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नाइट्रेट प्वॉयजनिंग से हुई गोवंशीय पशुओं की मौत

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उझानी (बदायूं)। कछला की कान्हा अस्थायी गोशाला में 22 गोवंशीय पशुओं की मौत के मामले में आईवीआरआई बरेली से पहुंची चिकित्सकों की छह सदस्यीय टीम ने रविवार आधी रात को ही पशुओं का पोस्टमार्टम किया। साथ ही विसरा प्रिजर्व करते हुए ब्लड का सैंपल भी लिया। सोमवार शाम आई रिपोर्ट मेें बताया गया कि नाइट्रेट प्वॉयजनिंग से पशुओं की मौत हुई है। इधर, इलाज के बाद बाकी गोवंशीय पशुओं की हालत में सुधार है। उन्हें बिनावर क्षेत्र की रफियाबाद गोशाला में भेजा गया है।
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रविवार रात में ही कमिश्नर रणवीर प्रसाद और डीआईजी आरके पांडेय मौके पर पहुंच गए। उन्होंने गोशाला की देखरेख करने वाले कर्मियों और अफसरों से जानकारी की। सोमवार को उझानी से गई पुलिस ने सोरों (कासगंज) से चारा सप्लाई देने वाले ठेकेदार को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया। कृषि विभाग की टीम भी सोरों पहुंची। जिस खेत के चारे की सप्लाई दी गई थी वहां से मिट्टी के नमूने लिए।
रविवार रात में ही डीएम दिनेश कुमार सिंह, एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एके जादौन मौके पर पहुंच गए थे। डीएम डीके सिंह ने रात में ही आईवीआरआई निदेशक डॉ आरके सिंह से संपर्क किया, इस पर उनके निर्देश पर वरिष्ठ सर्जन डॉ. अभिजीत पावड़े, पैथॉलाजिस्ट डॉ. केपी सिंह, चिकित्सक विशाल चंद्र, अभिषेक, मेडिसन महेंद्रन, विनोद कुमार ने पहुंचकर आधी रात बाद पशुओं का पोस्टमार्टम किया। साथ ही जांच के लिए किडनी, लिवर और ब्लड सैंपल कब्जे में लेने के बाद तड़के मृत पशुओं को गंगाघाट के दूसरे छोर पर गड्ढे खुदवाकर दफना दिया गया। आईवीआरआई टीम की सक्रियता से पांच गंभीर पशु बचा लिए गए। इधर, कछला ईओ सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि गोशाला में बचे 51 गोवंशीय पशुओं को बिनावर क्षेत्र की रफियाबाद गोशाला में शिफ्ट किया गया है।
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शासन तक मचा रहा हड़कंप
बरेली। कछला गोशाला में 22 गोवंशीय पशुओं की मौत का मामला शासन तक गूंजने के बाद गृह विभाग को जांच रिपोर्ट मिल गई है। आईवीआईआर चिकित्सकों की विशेष टीम ने जांच में पाया कि पशुओं की मौत नाइट्रेट प्वॉयजनिंग से हुई है। यह बाजरे के हरे चारे में ज्यादा होता है। बहरहाल सोमवार भोर तक आईवीआरआई चिकित्सकों ने पशुओं का पोस्टमार्टम कर रिपोर्ट भी सौंप दी है।

बाजरा के हरे चारा में भूसा मिलाना चाहिए था: सीवीओ
सीवीओ डॉ. एके जादौन के मुताबिक गोवंशीय पशुओं को रविवार शाम को बाजरा का जो हरा चारा खिलाया गया, उसमें भूसा नहीं मिलाया गया था। वैसे, पशुपालकों के मुताबिक अमूमन ऐसा नहीं होता। बाजरे के चारे की तासीर गर्म होती है। जिस खेत से बाजरा काटा गया हो, उससे पहले कीटनाशक का स्प्रे किया गया हो। हालांकि एसडीएम (सदर) पारसनाथ मौर्य ने बताया कि कासगंज जिले का जो ठेकेदार है, वह चार गोशालाओं में चारा की सप्लाई देता है। उसमेें तीन गोशालाएं कासगंज जिले की हैं। वहां पशु पूरी तरह स्वस्थ बताए गए हैं।

पड़ोसी की गाय अंदर, गोशाला के गोवंश घूमते मिले बाहर
उझानी। कछला की कान्हा अस्थायी गोशाला में 73 गोवंशीय पशु थे। रविवार शाम को 22 पशुओं की मौत के बाद गिनती शुरू हुुई तो आंकड़ा 70 पर टिक गया। अफसरों के पहुंचने के बाद आनन-फानन में संख्या रजिस्टर के अनुरूप पूरी हो गई। सुबह में रामऔतार नामक व्यक्ति गोशाला पहुंचा और एक गाय को खुद की बताते हुए दावा ठोंक दिया। गाय भी रम्हाते हुए उसके पास दौड़ आई। फिर क्या, खोजबीन शुरू हुई तो गोशाला का टैग लगा एक बछड़ा गंगा किनारे घुमंतू पशुओं के झुंड में मिल गया। टैग मार्का एक गाय पुलिस चौकी के पास घूमते मिली। बाद में गोशाला में गोवंशीय पशुओं की देखरेख करने वालों ने रामऔतार की गाय को उसके हवाले कर दिया।

कछला अस्थायी गोशाला में 22 गोवंश के मरने के बाद रविवार रात को आरवीआरआई की टीम ने पोस्टमार्टम किया था। जिसके बाद में विसरा को प्रिजर्व किया गया, जांच में गोवंश को दिया गया बाजरा चारा में नाइट्रेट मात्रा अधिक पाई गई है।
-डॉ. केपी सिंह, एचओडी, पैथौलॉजी, आरवीआरआई

आईवीआरआई द्वारा जो रिपोर्ट नमूनों की जांच व विश्लेषण के उपरांत दी गई है, उसमें मृतक गोवंश पशुओं को जो हरा चारा बाजरे का खिलाया गया है, उसमें नाइट्रेट की मात्रा अधिक होना बताया गया है। नाइट्रेट के कारण ही इन गोवंश की मृत्यु हुई है। सलाह दी गई है कि हरे चारे में 80 प्रतिशत तक भूसा मिलाकर ही जानवरों को खिलाएं। चिकित्सकों की सलाह अनुसार गोवंश को भविष्य में चारा इसी अनुपात में दिया जाएगा।
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- दिनेश कुमार सिंह, डीएम
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