बरेली। उम्र के आखिरी पड़ाव पर अपनों की बेरुखी से शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की दिक्कतों में घिरे बुजुर्गो की मदद अब पुलिस करेगी। बुजुर्गों के साथ दर्दनाक सलूक की ‘अमर उजाला’ में छपी कई खबरों पर एडीजी अविनाश चंद्र ने पिछले दिनों एसएसपी को सिस्टम में ऐसा इंतजाम करने का निर्देश दिया था कि अपनों के ठुकराने के बाद इधर-उधर भटकते फिरने वाले बुजुर्गों को आसानी से कानूनी मदद हासिल हो सके। अब एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय ने इसका खाका तैयार कर दिया है। बुजुर्गों की समस्याएं अब नियमित रूप से पुलिस परामर्श केंद्र में सुनी जाएंगी। तैयारियां पूरी करने के बाद अक्तूबर में इस कैंप की शुरुआत हो जाएगी।
दरअसल समाज कल्याण विभाग की ओर से उप्र माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण एवं कल्याण नियमावली 2014 लागू है। इसी के तहत डीजीपी के स्तर से बुजुर्गों की समस्याओं के निस्तारण के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। एडीजी जोन अविनाश चंद्र ने थानों में अलग रजिस्टर बनाकर बुजुर्गों की समस्याओं का रिकॉर्ड रखने, निवारण कराने और निस्तारण की मॉनीटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। अब ऐसे मामलों में समस्याओं के निदान को एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय ने पहल की है। पुलिस लाइन व सर्किल स्तर पर दंपती के विवादों के निस्तारण को लगने वाले परिवार परामर्श केंद्रों में ही बुजुर्गों को अपने परिवार और करीबियों से हो रही समस्याओं का निस्तारण किया जाएगा। एसएसपी ने बताया कि इसमें धन, आवासीय संपत्ति व जीवन को खतरे जैसी स्थिति में बुजुर्गों की शिकायत पर सुनवाई की जाएगी। ऐसा करके उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
काउंसलर के लिए मांगे आवेदन
अक्तूबर में शुरू होने वाली सुनवाई से पहले एसएसपी ने समाजसेवियों, रिटायर्ड राजपत्रित अधिकारियों से काउंसलर के तौर पर समाजसेवा करने के इच्छुक लोगों के आवेदन मांगे हैं। राजपत्रित अधिकारियों में पुलिस के अलावा अन्य विभाग से जुड़े लोग भी आवेदन कर सकते हैं। ये आवेदन तीन दिन में एसपी ट्रैफिक दफ्तर में जमा किए जाने हैं।