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सिपाही के बेटे की लाश देखने के बाद फंदे पर लटक गया पड़ोसी किशोर

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बरेली। सूखे नशे की लत और पड़ोसी छात्र की आत्महत्या का तरीका देख एक किशोर ने दिन भर भटकने के बाद शाम को घर जाकर फंदे पर लटककर जान दे दी। पड़ोसियों ने उसका शव लटका देखा तो रिश्तेदारी में गए परिवार को सूचना दी। परिवार ने आननफानन में शव की अंत्येष्टि कर दी। हालांकि दुखी पिता ने घटना स्वीकार करते हुए कहा कि वे चाहते हैं दूसरे बच्चे नशे की वजह से न मरें।
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प्रेमनगर क्षेत्र में झूलेलाल गेट के पास रहने वाले सिपाही प्रताप सिंह के बेटे पंकज उर्फ आदित्य ने गुरुवार रात अपने घर में फंदा लगाकर जान दे दी थी। छत पर रहने वाली किरायेदार लड़कियों की सूचना पर पुलिस पहुंची और रिश्तेदारी में गए परिवार को बुलाया था। चर्चा थी कि किराये पर रहने वाली कश्मीरी लड़की के चक्कर में पंकज ने जान दी है। हालांकि परिवार या पुलिस ने शुक्रवार को पोस्टमार्टम के वक्त भी इसकी पुष्टि नहीं की। पंकज के घर के पीछे गली में रहने वाला 17 वर्षीय अर्जुन उर्फ अज्जू पुत्र हीरालाल सिंधी गुरुवार रात पंकज का शव देखने पहुंचा था। शुक्रवार को भी वह उसके घर गया। वह पढ़ा लिखा नहीं था तो उसने अखबार में छपी पंकज की खबर भी लोगों से पढ़वाई। व्हाइटनर व डाएल्यूटर जैसा सूखा नशा करने वाले अज्जू ने इलेक्ट्रिकल शॉप संचालक रेहान समेत कई लोगों से कहा कि फंदा ऐसे लगाया जाता है, वह भी लगाकर देखेगा।
कुछ दूर रहने वाले अज्जू के नाना की हाल ही में मौत हो गई थी। दोपहर में पूरा परिवार उनकी तेरहवीं में गया था। इस बीच अज्जू ने दूसरी मंजिल पर दुपट्टे के सहारे फंदा लगाकर जान दे दी। शाम छह बजे सामने रहने वाली महिला ने अज्जू को लटकता देखा तो शोर मचाकर पड़ोसी बुला लिए। सूचना पर हीरालाल और उनकी पत्नी दौड़े चले आए। ये लोग अज्जू को उतारकर नजदीकी अस्पताल ले गए। अस्पताल गेट पर ही डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित किया तो इन्होंने दो घंटे में ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया। अज्जू का बड़ा भाई जयपुर में जरी का काम करता है। पिता पहले किराने की दुकान चलाते थे।
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पिता बोले- मेरे बेटे की जान गई, दूसरों की न जाए
हीरालाल जवान बेटे की मौत से आहत थे। स्थानीय नेता प्रदीप पुष्कर व अन्य उन्हें सांत्वना देने घर पहुंचे थे। हीरालाल ने स्वीकार किया कि बेटा अलग-अलग तरीके का नशा करता था। वह कभी बिजली की दुकान तो कभी कहीं और काम करता और उसकी कमाई से न जाने कहां से लाकर ये नशा करता था। नशे ने उसकी मानसिक स्थिति काफी हद तक खराब कर दी थी। वह अक्सर डिप्रेशन में रहता था। उसे सुधारने और इलाज की तमाम कोशिश कीं पर सफल न हो सके। अब बेटे की तो जान नहीं बचा सके पर ये चाहेंगे कि पुलिस प्रशासन दूसरे बच्चों को नशे के जाल से जरूर बचाए।
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