फरीदपुर। एक नजदीकी रिश्तेदार की करतूत से गर्भवती हुई किशोरी ने बृहस्पतिवार को सरकारी अस्पताल में एक बच्ची को जन्म तो दिया लेकिन उसे अपनाने से साफ इनकार कर दिया। बच्ची को जन्म देने के बाद वह चुपचाप अस्पताल से जाने लगी तो स्टाफ ने रोका। फिर भी उसने नवजात बच्ची को न छुआ और न अपने पास आने दिया। जब तक अस्पताल में रही, नफरत से बच्ची को देखती रही और फिर उसे छोड़कर चली गई। फिलहाल बच्ची की देखरेख सीएचसी स्टाफ कर रहा है। अधिकारियों के निर्देश पर शनिवार को चाइल्ड केयर की टीम अस्पताल पहुंचकर बच्ची को अपने कब्जे में लेगी।
फरीदपुर के सरकारी अस्पताल में गुरुवार रात करीब दो बजे एक 16 वर्षीय गर्भवती किशोरी को भर्ती कराया गया था। उसके साथ आए पिता ने उसे पेट दर्द होना बताया। डॉक्टरों ने जांच की तो पता चला कि उसे प्रसव पीड़ा हो रही है। इसके बाद्र फौरन महिला डॉक्टर को बुलाकर उसका प्रसव कराया गया। उसने एक बच्ची को जन्म दिया। प्रसव होने के बाद बाप-बेटी चुपचाप बच्ची को अस्पताल में ही छोड़कर जाने लगे तो डॉक्टरों और स्टाफ चौंक गया। उन्होंने उन्हें रोककर बच्ची को साथ ले जाने को कहा तो दोनों ने साफ इनकार कर दिया। लड़की न तो बच्ची को दूध पिलाने को तैयार थी, न अपने पास आने दे रही थी। इसके बाद स्टाफ ने एसडीएम और कोतवाली पुलिस को सूचना दी। अधिकारियों के निर्देश पर यूनीसेफ को सूचना दी गई। शनिवार को चाइल्ड केयर की टीम फरीदपुर सीएचसी पहुंच रही है। सूत्र बताते हैं कि किशोरी के साथ उसके एक करीबी रिश्तेदार ने ही हैवानियत की थी। वह गर्भवती हो गई लेकिन करीबी रिश्ते का मामला होने के कारण पुलिस से शिकायत नहीं की गई।
बिलखती बच्ची को स्टाफ ने पिलाया दूध
एक दिन की बच्ची दोपहर में जब भूख से तड़पते हुए रोने लगी तो स्टाफ ने मां से उसे दूध पिलाने की गुजारिश की, लेकिन उसने उसकी तरफ देखा तक नहीं। बल्कि स्टाफ को झिड़क दिया। इसके बाद अस्पताल कर्मचारियों ने दूध का इंतजाम किया और बच्ची को पिलाया। कपड़े भी कर्मचारियों ने ही उसे पहनाए।
कोर्ट तय करेगा बच्ची का भविष्य
नई गाइडलाइन के मुताबिक माता-पिता के बच्चे को अपनाने से इनकार करने के बाद उसे किसके सुपुर्दगी में दिया जाएगा इसका फैसला कोर्ट करेगा।