बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अनिल शुक्ला का अप्रैल 2020 में कार्यकाल पूरा हो रहा है। कहा जा रहा है कि अब वह इससे आगे तैयारी में लगे हैं। इसी बीच वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाकर उनकी तैयारियों पर हमला कर उनके प्रयासों को झटका दिया जा रहा है। कुलपति का भी कहना है कि यह मामला वित्त से जुड़ा है और वित्त अधिकारी ही सारे निर्णय लेते हैं लेकिन उन्हें इसमें शामिल कर लिया गया है।
बता दें कि रुहेलखंड विश्वविद्यालय के पास 250 करोड़ रुपये की सरप्लस धनराशि है। शासन का नियम है कि कोई भी सरकारी संस्थान अपनी बचत राशि को राष्ट्रीयकृत बैंकों में ही जमा करके लाभ अर्जित कर सकता है। मगर रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने इसमें से कुछ धनराशि पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी में निवेश कर दी, जिसमें पंजाब नेशनल बैंक की हिस्सेदारी आधी से काफी कम है। इसको लेकर ही मंगलवार सुबह खबर प्रसारित होने के बाद से विश्वविद्यालय में हड़कंप मचा है।
वित्त अधिकारी बोले- 30 करोड़ किए निवेश
वित्त अधिकारी सुरेश चंद्र उपाध्याय का कहना है कि विश्वविद्यालय को पेंशन का भुगतान अपने स्तर से करना होता है। इसके चलते ही करीब साल भर 30 करोड़ की एफडी पूरी होने पर पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस में निवेश कर दिया। इसमें बैंक की अपेक्षा करीब दो प्रतिशत ब्याज ज्यादा मिलता है। ऐसा सिर्फ रुहेलखंड विश्वविद्यालय ही नहीं मेरठ, लखनऊ, जौनपुर, आगरा विश्वविद्यालय और बीएचयू भी कर रहे हैं। तिमाही ब्याज मिलता है, जिससे पेंशन भुगतान होता है। शासनादेश कहता है कि पैसा बैंकों में न रखें या रखें तो राष्ट्रीयकृत बैंक में रखें लेकिन यह शासनादेश भी निष्प्रभावी हो चुका है। मेरे चार्ज लेने के बाद से विश्वविद्यालय की धनराशि में भी कोई कमी नहीं आई है।
मेरी छवि धूमिल करने की शुरुआत : कुलपति
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल का कहना है कि लोगों को लगता है कि यहां से रिटायर होकर मैं कहीं अच्छी जगह न पहुंच जाऊं इसलिए यह मेरी छवि धूमिल करने की शुरुआत की गई है। वित्तीय मामलों में अंतिम राय वित्त अधिकारी की होती है। उन्हीं के निर्णय से मैं सहमत होता हूं। एग्जीक्यूटिव काउंसिल उन्हें रोक नहीं सकती। पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस रुहेलखंड विश्वविद्यालय ही नहीं प्रदेश के लगभग सभी विश्वविद्यालय का पैसा लगा है। कोई भी पैसा लेकर भागा नहीं है, एक जगह से निकालकर दूसरी जगह निवेश किया गया है। मुझे यह भी जानकारी नहीं है कि वित्त अधिकारी ने इसमें कितने रुपये जमा किए हैं।