बरेली। करीब महीने भर पहले महिला अस्पताल में लिफ्ट टूटने की घटना की तकनीकी जांच रिपोर्ट ने अस्पताल प्रशासन की बड़ी लापरवाही उजागर की है। रिपोर्ट के मुताबिक लिफ्ट टूटने की वजह उसमें क्षमता से ज्यादा वजन उठाना नहीं था बल्कि काफी समय से मेंटिनेंस न होने की वजह से लिफ्ट टूटी थी। तकनीकी जांच रिपोर्ट आने के बाद हादसे के लिए बदायूं के स्वास्थ्य कर्मियों को जिम्मेदार बता रहे अफसर अब खुद इस मामले में घिरने लगे हैं। गर्दन बचाने के लिए अब तर्क दिया जा रहा है कि लिफ्ट में कितने लोग मौजूद थे, यह नहीं गिना जा सका था।
जिला महिला अस्पताल में लिफ्ट गिरने बड़ा हादसा होने से बचा था। हादसे के बाद महिला अस्पताल के अफसरों ने इसके लिए बदायूं से प्रशिक्षण लेने आए 19 स्वास्थ्य कर्मियों को जिम्मेदार बताया था। कहा गया था कि लिफ्ट की क्षमता सिर्फ पांच लोगों को ले जाने की थी लेकिन इसके बावजूद इसमें सभी 19 लोग एक साथ घुस गए थे। क्षमता से चार गुना वजन होने से लिफ्ट टूट गई। 11 सितंबर को इस हादसे की जांच के लिए लखनऊ से टेक्निकल टीम बुलाई गई थी। अब इस टीम जांच रिपोर्ट ने अस्पताल प्रशासन पर ही कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
और बड़ा हो सकता था हादसा
जांच रिपोर्ट के मुताबिक लिफ्ट में एक साथ 26 लोगों को ले जाने की क्षमता है जबकि इसमें 20 लोग ही सवार थे। जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि लिफ्ट का अप लिमिट सेफ्टी और डाउन लिमिट सेफ्टी उपकरण खराब थे। डोर का ड्राइव सेट भी काम नहीं कर रहा था। इसी कारण एलिवेटर पूरी तरह काम नहीं कर सका और क्षमता से कम वजन होने के बाद भी चार फुट ऊंचाई तक जाकर लिफ्ट टूटकर गिर पड़ी। हादसा और बड़ा हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लिफ्ट में लगे लिफ्टिंग वायर, सेफ्टी अलार्म और ब्रेकिंग सिस्टम सही थे लेकिन मेंटिनेंस न होने की वजह से इन उपकरणों ने काम नहीं किया।
अब सीएमएस बोलीं- गिन ही नहीं पाए कि लिफ्ट में कितने लोग थे
टेक्निकल जांच रिपोर्ट सामने आते ही अस्पताल प्रशासन अपने दावे से मुकर गया। पहले अस्पताल प्रशासन ने ज्यादा वजन को लिफ्ट के टूटने की वजह बताया था मगर अब यह जानकारी होने से इनकार कर रहा है कि लिफ्ट में कितने आदमी मौजूद थे। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि लिफ्ट गिरने के बाद दरवाजा टूटा तो उसमें से लोग तेजी से बाहर निकले, इसलिए उन्हें गिना नहीं जा सका। हालांकि हादसे के बाद लिफ्ट में मौजूद ऑपरेटर ने बताया था लिफ्ट में उसके अलावा बदायूं से प्रशिक्षण पर आए 19 स्वास्थ्यकर्मी चढ़े थे।
अब लिफ्ट ठीक करने को चाहिए एक लाख का बजट
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक लिफ्ट की मरम्मत के लिए अब एक लाख का बजट चाहिए। इसमें डोर ड्राइव सेट व वी3एफ ड्राइव के लिए 34,490 रुपये, डोर सेट के लिए 36,500 रुपये, अप लिमिट सेफ्टी के लिए 15,500 रु पये और डाउन लिमिट सेफ्टी के लिए 15,500 रुपये का खर्च अनुमानित है।
टेक्निकल टीम ने रिपोर्ट दे दी है। मेंटिनेंस में करीब एक लाख रुपये का बजट खर्च होगा जो एडी हेल्थ से मांगा गया है। हम लिफ्ट का मेंटिनेंस कराते हैं। लिफ्ट ज्यादा वजन से ही टूटी है, लिफ्ट में कितने आदमी सवार थे, इसकी गिनती नहीं हो सकी थी। - डॉ. अलका शर्मा, सीएमएस, महिला अस्पताल