बरेली। बीडीए ने नाथनगरी के पौराणिक मंदिरों के सौंदर्यीकरण और उन्हें स्वच्छ बनाने के लिए कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत इन मंदिरों में नक्षत्र और पंचवाटिका तैयार कराने के साथ धोपेश्वरनाथ मंदिर में सरोवर को साफ करने के लिए संयत्र भी लगाया जाएगा। मंदिरों में चढ़ाए जाने वाले फूलों से खाद तैयार होगी। बीडीए ने इसके लिए मशीनें उपलब्ध कराने वाली कुछ कंपनियों से भी संपर्क किया है। बीडीए उपाध्यक्ष दिव्या मित्तल ने बताया कि बीडीए की इस परियोजना का मकसद पर्यावरण संरक्षण है और इसे दो से तीन महीने में पूरा कर लिया जाएगा।
बीडीए सभागार में पत्रकारों से रूबरू बीडीए उपाध्यक्ष दिव्या मित्तल ने बताया कि अलखनाथ मंदिर में पंचवाटिका तैयार होगी। इसमें आंवला, बरगद, पीपल, बेल सहित दूसरे औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। तपेश्वरनाथ मंदिर में राशि वन और बनखंडीनाथ मंदिर में सप्तर्षि वन तैयार किया जाएगा। इसमें तुलसी, अगस्त्य, चिड़चिड़ा, दूब, बेल, शमी और धतूरा पौधे लगाए जाएंगे। धोपश्वर नाथ मंदिर में नवग्रह वाटिका तैयार होगी। बीडीए उपाध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने पर्यटन विभाग के कुछ अधिकारियों के साथ इन मंदिरों का दौरा किया था। इस दौरान पाया कि कई मंदिरों के सरोवर दूषित हैं जिस वजह से श्रद्धालुओं को असुविधा होती है। इसे देखते हुए धोपेश्वरनाथ मंदिर के सरोवर को स्वच्छ बनाने के लिए संयत्र लगाया जाएगा। मंदिरों के प्राचीन कुओं को भी पुनर्जीवित किया जाएगा। बीडीए उपाध्यक्ष ने बताया कि प्रत्येक नाथ मंदिर में चढ़ाए जाने वाले फूलों से भी खाद तैयार होगी ताकि मंदिरों में गंदगी के साथ खाद की दिक्कत भी दूर हो सके। मंदिरों में सोलर लाइटें भी लगाई जाएंगी।
गोशालाओं के गोबर से बनेगी लकड़ी
पर्यावरण संरक्षण के लिए हवन और अंत्येष्टि आदि में लकड़ी का उपयोग कम करने के लिए बीडीए ने शहर के पौराणिक मंदिरों में गोबर से लकड़ी तैयार करने की योजना बनाई है। बीडीए उपाध्यक्ष ने बताया कि इसके लिए एक कंपनी से बात हो गई है, जो मंदिरों को 60 हजार रुपये में मशीन उपलब्ध कराए। इसे हाथ या मोटर दोनों से चलाया जा सकता है। मंदिरों की गोशालाओं से बड़ी मात्रा में गोबर भी आसानी से मिल जाएगा।