बरेली। जनाक्रोश को भांपकर उत्तर प्रदेश सरकार ने अभी सेंट्रल मोटर व्हीकल एक्ट लागू करने को मंजूरी नहीं दी है। इसमें शामिल प्रावधानों को लेकर लोगों में अभी से डर बैठा हुआ है। नए एक्ट में हर साल एक से दस फीसदी जुर्माना बढ़ने का प्रावधान है। ऐसे में लोगों को डर सता रहा है कि वाहन की कीमत से ज्यादा जुर्माना अदा न करना पड़ जाए। हालांकि अधिकारी दावा कर रहे हैं कि किसी को फिजूल में परेशान करने की शासन की मंशा नहीं है। अमर उजाला ने इस संवेदनशील मुद्दे पर लोगों से बात की तो उनका दर्द जुबां पर आ गया।
क्रेन कार्रवाई से आई बाजार में मंदी
- प्रशासन और नगर निगम ने शहर के किसी भी बाजार में भी अभी तक पार्किंग की सुविधा नहीं दी है। इसके उलट ट्रैफिक पुलिस की क्रेन बाजार में खड़े वाहनों को खींच ले जाती है। हमारी दुकानों पर कई ग्राहक इसी डर से नहीं आते कि दो सौ रुपये का सामान लेने आएंगे तो कार या बाइक खिंचने पर हजारों रुपये जुर्माना कौन भरेगा। बाजार में मंदी की बड़ी वजह यही है। - आशीष अरोड़ा, स्टेशनरी व्यापारी
केवल चालान काटना ही उद्देश्य
- ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई का उद्देश्य केवल चालान काटना ही रह गया है। वे लोगों को नियमों के प्रति सचेत कराएं तो बेहतर होगा। जब उन्हें चालान करना होता है तो कोई भी बहाना खोज लेते हैं। ये तो गलत ही है। अब सेंट्रल मोटर व्हीकल एक्ट को लागू करने की बात कही जा रही है। ऐसा हुआ तो उसके नियमों में फंसकर लोगों को वाहन ही सड़क पर छोड़ने पड़ेंगे, जुर्माना तो अदा हो नहीं पाएगा।- कीर्ति सिंह, शिक्षिका
सुविधाएं देने के बाद हो कार्रवाई
- पूरे शहर में कहीं भी पार्किंग या नो पार्किंग का बोर्ड नहीं लगा है। ऐसे में प्रशासन को पहले पार्किंग की सुविधाएं देनी चाहिए और फिर ट्रैफिक पुलिस से कार्रवाई करानी चाहिए। क्रेन का शुल्क इतना है कि सामान्य वाहन चालक की हालत खराब हो जाती है। अब अगर और जुर्माना बढ़ने की नौबत आ गई तो क्या होगा। - मोहित अग्निहोत्री, इंश्योरेंस सेक्टर कर्मचारी
- प्रदेश में अभी सेंट्रल मोटर व्हीकल एक्ट लागू नहीं हुआ है। फिलहाल पुरानी व्यवस्था के आधार पर ही जुर्माना किया जा रहा है। हेलमेट और सीट बेल्ट जैसे नियमों के शत प्रतिशत पालन के लिए सख्ती हो रही है। किसी को फिजूल में परेशान करने की मंशा नहीं है। जो चालान गलत या अनियमित तरीके से हो जाते हैं, शिकायत पर उनकी समीक्षा करके समस्या का निदान भी कराया जाता है। - एससी गंगवार, एसपी ट्रैफिक