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बेघर कर दिया तो अब कैसा लिहाज, रुपये मेरे हैं, वो तो मैं लेकर ही रहूंगा

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बरेली। ‘पैसा खुदा तो नहीं पर कसम खुदा की खुदा से कम भी नहीं’, उम्र के आखिरी पड़ाव पर भांजी के हाथों छले गए 80 साल के जादौ सिंह की जिंदगी का अब यही फलसफा है। अपनी जिंदगी के गुजरे दस सालों को भयावह ख्वाब बताने वाले जादौ सिंह कहते हैं कि सोचा था कि भांजी और उसका पति ही उनके बुढ़ापे की लाठी बनेंगे लेकिन अब वह उनसे वह सबकुछ वापस लेंगे जो दिया है। बोले, अर्थशास्त्र का शिक्षक होने के बाद भी अर्थ का महत्व और उसकी परिभाषा नहीं समझ सका इसीलिए ये दुर्दिन भुगत रहा हूं।
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पेंशन की रकम के लिए दो हफ्ते तक बंधक बनाकर पीटे गए जादौ सिंह किसी तरह छूटकर बदायूं से भटकते हुए शनिवार को वाकर के सहारे घिसटते हुए कोतवाली पहुंचे थे। पुलिस ने उन्हें काशीधाम वृद्धाश्रम में भेज दिया था। अपार प्रेम के साथ सारी संपत्ति देने के बाद भी बदले में जो मिला, उसने जादौ सिंह के दिल में भांजी के लिए नफरत भर दी है। वह अब उससे अपना दिया हुआ सारा पैसा और संपत्ति वापस चाहते हैं। कहते हैं, जिस भांजी ने घर से बेघर कर दिया, उसके लिए कैसी लोकलाज। क्रोध से भरकर कहते हैं कि वह अपने घर जाना चाहते हैं क्योंकि वो उनका है। भांजी को बाहर निकालकर एक नौकरानी रखेंगे और जिंदगी के कुछ साल तनावमुक्त होकर जिएंगे। कहते हैं, उनकी जिंदगी 60 साल पूरे कर चुके लोगों के लिए सबक है। उन्हें याद रखना चाहिए कि उनकी गाढ़ी कमाई ही असमर्थ होने के बाद उनके बुढ़ापे की लाठी बनेगी, कोई और नहीं।

350 फूल चुने, जल्द सिराए जाएंगे
बरेली। अमर उजाला की पहल पर महिला जागृति मंच, हिंदू शक्तिदल के बाद अब सर्वधर्म सेवा समिति भी बुजुर्गों को मुक्ति दिलाने के लिए आगे आया है। समिति के संस्थापक प्रवीण उपाध्याय गुलाबबाड़ी स्थित श्मशान भूमि पहुंचे। उन्होंने श्मशान भूमि की संचालक ट्रस्ट के अध्यक्ष मनोहर स्वरूप से बातचीत के बाद दो वर्ष पुराने 350 अस्थि कलशों को पितृपक्ष में विसर्जित करने का निर्णय लिया है।
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प्रवीण ने बताया कि गुलाबबाड़ी श्मशान भूमि में पांच साल तक पुराने अस्थि कलश रखे गए हैं, जिन्हें उनके परिजन सिराने ही नहीं आए। इसलिए अब वे दो साल से अधिक पुराने करीब 350 फूल सिराने का संकल्प लिया है। बताया कि पिछले साल भी उन्होंने पांच साल से अधिक पुराने करीब 350 फूल सिरा चुके हैं। उन्होंने कहा कि जिन परिजनों के दो साल से अधिक पुराने फूल गुलाबबाड़ी श्मशान भूमि में रखे हुए हैं, वे अगर परिजनोें के फूल सिराना चाहते हैं तो वे संपर्क कर सकते हैं।
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