बरेली। शहर में सेंट्रल सीवर लाइन डालने का काम शुरू कर दिया गया है। इसके लिए शहर की तमाम सड़कों की खुदाई होगी, जिसके नीचे पानी, पीएनजी, सीएनजी की पाइपलाइन, मोबाइल और बिजली की लाइनें बिछी हैं लेकिन इनको बचाकर काम करने की कोई मजबूत प्लानिंग नहीं है। जल निगम ने इन विभागों को काम के दौरान निगरानी रखने संबंधी पत्र लिखकर अपना पल्ला झाड़ लिया है। मगर इस रवैये के चलते आने वाले समय में शहरवासियों को सिर्फ धूल-मिट्टी ही नहीं, पानी-बिजली जैसी अन्य सेवाएं बाधित होने से होने वाली परेशानियां झेलने के लिए भी तैयार रहना होगा।
शहर में करीब 50 साल पुरानी जर्जर सीवर लाइन को बदलने की 26 अगस्त से कवायद शुरू हो चुकी है। इसके तहत 54.85 करोड़ रुपये से 12.74 किलोमीटर लंबी सेंट्रल सीवर लाइन बिछाई जाएगी। यह लाइन सिंधुनगर से श्यामगंज, कालीबाड़ी होकर चौपुला चौराहा तक, खुर्रम गौटिया से गांधी उद्यान, प्रभा सिनेमा, चौकी चौराहा हाकर चौपुला चौराहा तक, मुख्य डाकघर से कचहरी, कचहरी से जंक्शन पुलिस चौकी, मालगोदाम रोड होते हुए चौपुला चौराहा तक, चौपुला चौराहा से बरेली सिटी स्टेशन होते हुए जसोली फाटक तक और स्टेट बैंक कालोनी से गढ़ी चौकी, अलखनाथ मंदिर, किला चौराहा, दूल्हा मियां के मजार होते हुए जसोली फाटक तक पहुंचेगी। इस पूरे क्षेत्र में सीवर लाइन डालने के दौरान करीब डेढ़ साल तक खुदाई के चलते धूल-मिट्टी और गड्ढों का सामना करना होगा। मगर इसके साथ ही लोगों को बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ेगा। इसकी वजह सड़क के नीचे बिछी पानी, पीएनजी, सीएनजी की पाइपलाइन, मोबाइल और बिजली की लाइनें हैं, जिन्हें खुदाई के दौरान बचाने के लिए जलकल विभाग के पास कोई ठोस कार्य योजना नहीं है।
पत्र के भरोसे जारी खुदाई
सीवर डालने के लिए खुदाई शुरू कर दी गई है। मगर इसके नीचे बिछी लाइनें कटने से बचाने के लिए जल निगम ने संबंधित विभागों को इस दौरान अपने अधिकारी तैनात करने के निर्देश दिए हैं, जो बता सकें कि कहां पर पानी की लाइन है या बिजली की लाइन है। मगर यह असंभव व्यवस्था है, जिसके चलते सेंट्रल सीवर लाइन के कार्य के दौरान इनकी दिक्कतें होना भी तय है।
मेयर मांग रहे 35 साल की गारंटी, अफसर हलकान
बरेली। सेंट्रल सीवर लाइन का प्रोजेक्ट शुरू होते ही इस पर घमासान मच गया है। मेयर उमेश गौतम ने इसका व्यास कम होने पर आपत्ति जताते हुए शुक्रवार को जल निगम के अफसरों के साथ मीटिंग की। जब अफसरों ने पाइपलाइन का आकार सही होने का तर्क दिया तो मेयर ने कहा कि लिखकर दो कि 35 साल तक इस लाइन में कोई दिक्कत नहीं होगी। इसको लेकर जल निगम के अफसरों में हड़कंप मचा है।
करीब 50 साल पहले शहर में पड़ी पाइपलाइन का 600-1800 मिलीमीटर व्यास है। मगर अब जो पाइपलाइन डाली जा रही है, उसका व्यास 250-1600 मिलीमीटर तक है। इसको लेकर ही मेयर उमेश गौतम और पार्षद असंतुष्ट हैं। उनका कहना है कि 50 साल पुरानी पाइपलाइन की अपेक्षा कम व्यास की पाइपलाइन डाली जा रही है, मौजूदा समय की जनसंख्या के अनुसार यह पर्याप्त नहीं है। उन्होंने इसमें गोलमाल की आशंका जताते हुए शुक्रवार को जल निगम के अफसरों के साथ मीटिंग की। इस पर जल निगम के अफसरों ने लखनऊ की टीम से प्रोजेक्ट बनाने और इसके आधुनिक समय के अनुसार होने का तर्क देते हुए सही करार दिया लेकिन मेयर संतुष्ट नहीं हुए। इस पर उन्होंने जल निगम के चीफ इंजीनियर को बुलाने को कहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर यह लाइन ठीक है तो जल निगम के अफसर लिखकर दें कि आने वाले 35 साल में कोई दिक्कत नहीं होगी। इसको लेकर जल निगम के अफसरों में हड़कंप मचा है।
सेंट्रल सीवर लाइन का प्रोजेक्ट लखनऊ के विशेषज्ञों से बनवाया गया है। इसमें जरूरत के मुताबिक पाइप इस्तेमाल किया जाएगा। जमीन के नीचे जिन विभागों की लाइनें बिछी हैं, उन्हें भी निगरानी के लिए पत्र लिखा गया है ताकि कोई लाइन डिस्टर्ब न हो।
- आरसी अग्रवाल, सहायक अभियंता, जल निगम