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हम तो फंस गए मंत्री जी! निगम में तो चढ़ी छोटे साहब की बलि.. अब यहां किसकी चढ़ेगी

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बरेली। आजकल चर्चा है कि बड़े साहब में कुछ तो दम है कि वे मुख्यमंत्री आदित्य नाथ योगी जी और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद तक को अनसुना कर देते हैं। यही वजह है कि 12 दिन पहले स्थानांतरित हुए अफसर अभी तक रिलीव नहीं किए हैं। ऐसी ही स्थिति नगर निगम चीफ इंजीनियर तबादले मामले में हुई और ज्यादा फजीहत होने के बाद यहां से विदाई की गई।
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मुख्यमंत्री आदित्य नाथ योगी जी के निर्देश पर शासन ने 16 अगस्त को कई पीसीएस अफसर इधर-उधर किए थे। इनमें बरेली से एडीएम प्रशासन राम सेवक द्विवेदी भी शामिल थे। नियुक्ति अनुभाग-2 से विशेष सचिव धनंजय शुक्ला ने यह आदेश जारी किए थे। उन्होंने आदेश में साफ लिखा है कि स्थानांतरित अधिकारी प्रतिस्थानी की प्रतीक्षा किए बगैर तत्काल नवीन तैनाती पद कार्यभार ग्रहण करेंगे। इन अधिकारी को कोई अवकाश स्वीकृत करने और तत्काल कार्यमुक्त नहीं होने पर अनुशासनहीनता मानी जाएगी। ऐसे मामलों में संबंधित पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। लेकिन 12 दिन बीतने पर भी अभी तक शाहजहांपुर स्थानांतरित अधिकारी एडीएम प्रशासन राम सेवक द्विवेदी रिलीव नहीं किए गए हैं, क्याेंकि साहब काफी दमदार हैं। बताया जाता है कि इस्तीफा देने वाले एक कद्दावर मंत्री ने अभयदान दे रखा था, लेकिन अब एडीएम प्रशासन फंस गए हैं। उधर चर्चा है कि साहब में दम है तभी तो स्थानांतरित अधिकारी 12 दिन बाद भी रिलीव नहीं हो पाया है।
इससे पहले नगर निगम में एक पूर्व मंत्री ने चीफ इंजीनियर एसके अंबेडकर पर हाथ रखा दिया था। बताया जाता है कि चीफ इंजीनियर के कथित घपलों के चलते मेयर उमेश गौतम ने तबादला करा दिया था, लेकिन उसे साहब ने मंत्री जी की आढ़ में रिलीव नहीं किया। मामला जब मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा तब कही साहब बैकफुट पर आए और अंबेडकर की विदाई हो गई।
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डीएम ने तबादला आदेश
एडीएम को मार्क दिया
शासन से आया आदेश डीएम ने एडीएम प्रशासन राम सेवक द्विवेदी को ही मार्क कर दिया और स्थानांतरित अधिकारी द्विवेदी ने अपने अधीनस्थ स्टाफ को अग्रसारित कर दिया। लेकिन कार्यमुक्त करने के आदेश जारी नहीं हुए। यह चर्चा अफसरों और कलेक्ट्रेट में बनी हुई है। एडीएम द्विवेदी लोकसभा चुनाव में भी विवादों में आए थे, उन पर आरोप लगे थे कि चुनाव में छपने वाली सामग्री सप्लाई बिना किसी प्रक्रिया के ही कराई थी। ऐसे ही मामले में पीलीभीत एडीएम पर कार्रवाई थी। क्योंकि एडीएम पर ऊपर साहब का हाथ था।
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