बरेली। बीडीए कालोनी तुलाशेरपुर में नगर निगम लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है। बारिश के दौरान नाला और सड़क का कटान होने से यहां के कई घर खतरे में आ गए हैं, जिसके चलते लोगों की नींद उड़ गई है। मगर निगम अफसरों ने यहां कटान रोकने का इंतजाम करने के बजाय चार बल्लियां लगाईं और रास्ता बंद करके पल्ला झाड़ लिया है। दोबारा बारिश के खतरे को देख यहां के लोग परेशान हैं, मगर निगम अफसर बेफिक्र हैं।
छोटी विहार बार्ड की बीडीए कालोनी तुलाशेरपुर से बड़ा नाला गुजर रहा है। इसके जरिये शहर की एक बड़ी आबादी का पानी नकटिया नदी में जाकर गिरता है। करीब सप्ताह भर पहले निगम के वाहन की टक्कर से नाले की दीवार क्षतिग्रस्त होने के बाद यहां कटान शुरू हो गया। बृहस्पतिवार रात तेज बारिश हुई तो नाले का एक बड़ा हिस्सा धराशायी हो गया और आधी से ज्यादा सड़क कट गई। पार्षद पति चमन सक्सेना की सूचना पर पहुंची निगम टीम ने यहां बल्लियां लगाकर आवागमन रोक दिया है। मगर रविवार तक यहां कटान रोकने का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। सुरक्षा के नाम पर निगम ने यहां लोगाें से भद्दा मजाक किया है। सड़क के पूर्वी सिरे पर काफी मोटा आरसीसी का स्लैब पड़ा हुआ है। कई टन वजन का यह स्लैब नाले में झुकने लगा है, जिस रोकने के लिए नगर निगम के कर्मचारियों ने चार पतली बल्लियां लगा दी हैं। हल्की बारिश में ही इन बल्लियों का गिरना तय है।
दहशत में लोगों को नहीं आ रही नींद
यहां सड़क किनारे करीब दर्जन भर मकान हैं और आधी के करीब सड़क बारिश में कट चुकी है। इसके चलते यह लोग दहशत में हैं। अगर फिर बरसात हुई और कटान नहीं रुका तो यह घर भी खतरे में आ जाएंगे। इसके चलते यहां के लोगों को नींद उड़ी हुई है। उनका कहना है कि अगर मकान क्षतिग्रस्त हो गया तो उन्हें ठीक कराना भी मुश्किल होगा।
‘सप्ताह भर पहले नगर निगम की गाड़ी ने ही दीवार तोड़ दी थी। अब इसका इंतजाम नहीं किया जा रहा है। हम लोगों के घर खतरे में आ गए हैं।’
- राजकुमार
‘निगम को हम लोगों की बिल्कुल परवाह नहीं है। कटान का इंतजाम करने के बजाय रास्ता रोक दिया है। बारिश में खतरा लगातार बना हुआ है।’
- अनिल बाबू
‘सड़क के किनारे ही हम लोगों के मकान हैं। सड़क में भी दरार आ गई है। हम लोगों के घर खतरे में हैं, जिसके चलते नींद नहीं आ रही है।‘
- रेशमा देवी
‘नगर निगम ने कोई ढंग से इंतजाम नहीं किया है। इसके चलते सड़क किनारे के मकानों पर लगातार खतरा बना हुआ है, मगर कोई नहीं सुनता।’
- सुनीता देवी