आपदा और आपात स्थिति के समय पुलिस-प्रशासन के साथ मिलकर नागरिकों की मदद करने वाला सरकारी संगठन सिविल डिफेंस अब युवा और स्मार्ट होगा। इसमें वार्डन के रूप में जुड़ने वालों के लिए बुनियादी अर्हता संबंधी वरीयता में अहम बदलाव हुआ है। स्मार्ट फोन, ऐप और सोशल नेटवर्किंग वाले इस दौर के साथ ताल से ताल मिला सकने में सक्षम युवा नागरिकों को संगठन से जोड़ने पर जोर है। सबसे पहले तो उम्र की सीमा भी 18 वर्ष से घटाकर 15 वर्ष कर दी गई है। साथ ही व्हाट्सऐप पर उपलब्ध, इंटरनेट यूजर और ईमेल आईडी धारक अभ्यर्थी को चयन में वरीयता देना तय हुआ है।
राज्य के पुलिस महानिरीक्षक/ संयुक्त निदेशक (नागरिक सुरक्षा निदेशालय) ने बरेली समेत राज्य के सभी जिलाधिकारियों को इस संबंधी पत्र भेजा है। वार्डन बनने के लिए बुनियादी योग्यता के रूप में भारत का नागरिक होना जरूरी है। साथ ही शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना भी आवश्यक है। राजनीतिक पार्टी से संबंध रखने वाले या अपराधी अथवा दुष्चरित्र लोग इसके लिए अपात्र हैं। जिस क्षेत्र में अभ्यर्थी नियुक्त होना चाहता है उसे वहीं का निवासी होना जरूरी है एवं क्षेत्र में अच्छी छवि वाला व प्रभावशाली होना चाहिए। बरेली के नागरिक सुरक्षा विभाग के उप नियंत्रक कश्मीर सिंह ने बताया कि अभी जिले में करीब पांच फीसदी वार्डन ही नई अर्हता की कसौटी पर खरे उतरने लायक हैं। उन्होंने जनपद के प्रबुद्ध एवं प्रभावशाली निष्काम सेवा के इच्छुक नागरिकों से संगठन में जुड़ने की अपील की है।