स्टांप शुल्क की वसूली न हो पाने से राजस्व को भी हो रहा नुकसान
बरेली। तहसीलदारों के निरीक्षण आख्या न देने से स्टांप संबंधित लंबित वादों का निस्तारण नहीं हो पा रहा। इससे स्टांप शुल्क की वसूली को भी झटका लगा है। रजिस्ट्री विभाग के अधिकारियों की समीक्षा में प्रशासन को कई तहसीलों में स्टांप शुल्क वसूली की स्थिति काफी खराब मिली है।
एडीएम वित्त मनोज कुमार पांडेय ने स्टांप वसूली की खराब स्थिति पर उप निबंधक प्रथम बृजेश कुमार और द्वितीय आरके गौतम के साथ बैठक की। इसमें सामने आया कि उप निबंधक प्रथम ने 11.74 करोड़ की जगह 9.36 करोड़ की वसूली की है, जो लक्ष्य का 79.77 प्रतिशत ही है, जबकि उप निबंधक द्वितीय ने भी 11.98 करोड़ की बजाय 8.49 करोड़ की वसूली कर केवल 70.92 फीसदी ही टारगेट पूरा किया है। इसी तरह उप निबंधक बहेड़ी ने स्टांप शुल्क से 98.35 प्रतिशत, उप निबंधक आंवला ने 84.59 प्रतिशत, फरीदपुर ने 79.77 प्रतिशत, नवाबगंज ने 78.69 प्रतिशत और उप निबंधक मीरगंज ने 72.04 प्रतिशत का लक्ष्य ही पूरा किया है। अधिकारियों का कहना है कि कई तहसीलदार अपने क्षेत्र में स्टांप वाद की स्थलीय निरीक्षण आख्या नहीं दे रहे हैं।