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अभिव्यक्ति की आजादी जरूरी..पर एक सीमा तक

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लखीमपुर खीरी। संविधान ने देशवासियों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार दिया है। इसी अधिकार के कारण देश का हर नागरिक अपने विचारों को प्रकट कर सकता है। पिछले कुछ सालों में इस बात को लेकर देश के नागरिक और ज्यादा मुखर हुए है। इसी का परिणाम है कि वह अपने अधिकारों को लेकर सड़कों पर भी उतरने लगा है। अनुच्छेद 370 हो या फिर तीन तलाक, सीएए, एनआरसी और एनपीए जैसे मुद्दे, इन पर खुलकर बहस होने के साथ विरोध भी हो रहा है। संविधान द्वारा मिले अधिकारों का कितना सदुपयोग हो रहा है और कितना दुरुपयोग, इस पर बुद्धजीवियों से हुई बातचीत के अंश।
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अभिव्यक्ति की आजादी जरूरी है। मगर, एक सीमा रेखा तक। लोकतंत्र में शांतिप्रिय ढंग से अपनी बात रखनी चाहिए। देश सर्वोपरि है, इसलिए देशहित के लिए कानून का विरोध करना गलत है। यह हमें ध्यान रखना चाहिए।
मधु त्रिपाठी
प्रधानाचार्य
विद्या निकेतन इंटर कॉलेज
लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है। मगर, जब बात देशहित की हो तो उसे पहली प्राथमिकता देनी चाहिए। सीएए आदि को लेकर जो भ्रम का माहौल बनाया जा रहा है वह गलत है। यह कानून नागरिकता देने का है न कि लेने का।
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जया अग्निहोत्री
प्रबंधक, जेके कन्या डिग्री कॉलेज
मुल्क मुश्किल हालात से गुजर रहा है। ये हालात मौजूदा हुकूमत ने पैदा किए हैं। नोटबंदी से लेकर जीएसटी तक और मुल्क की कई संस्थाओं को डिस्टर्ब किया है। हद ये हो गई कि संविधान के साथ भी छेड़छाड़ शुरू कर दी। संविधान का बचाव करना हमारा फर्ज है। इसके लिए हम हर कुर्बानी देने को तैयार है। संविधान की ओर से दी गई आजादी को छीनने का प्रयास किया जा रहा है।
मौलाना इश्हाक
पेशइमाम, जामा मस्जिद
थरवरनगंज
लोकतंत्र में जन आकांक्षाओं को जब जनतांत्रिक ढंग से अभिव्यक्त किया जाता है तो शासन, प्रशासन का यह नैतिक दायित्व बनता है उनको तरजीह दे।
डॉ. जेएन सिंह
प्रवक्ता वाईडी कॉलेज
सीएए की जरूरत है, क्योंकि बंटवारे के समय हिंदू एवं अन्य धर्म के जो लोग भारत में नहीं आ सके और अब बांग्लादेश, अफगानिस्तान एवं पाकिस्तान में प्रताड़ित हैं उन्हें देश की नागरिकता मिलनी चाहिए। इसका विरोध गलत है।
डॉ. अजय कुमार आगा
समाजसेवी एवं पूर्व अध्यक्ष रोटरी क्लब
सीएए में जिन्हें नागरिकता देने का प्राविधान है उनकी पहचान के लिए एनआरसी लाया जाएगा। जिसकी वजह से साधनहीन व्यक्ति प्रपत्र देने में असमर्थ होंगे। इसलिए मुस्लिम समुदाय के लोग इसका विरोध कर रहे हैं। धार्मिक आधार पर नागरिकता देना संविधान के खिलाफ है।
मोहम्मद आमिर
विभागाध्यक्ष गणित
युवराजदत्त महाविद्याल
देेशवासियों के पास एक पहचान पत्र होना चाहिए, जो उसके लिए गर्व की बात होगी। सीएए हो या फिर एनपीए दोनों देश हित में हैं। विरोध करने के बजाय लोगों को इसका पालन करना चाहिए।
डॉ. आरसी अग्रवाल
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक जिला अस्पताल
देशहित के लिए सीएए काननू जरूरी है। हम आजाद रहें और देश का विकास और समृद्धि सही तरीके से हो सके, इसलिए कानून लागू किया गया है। इसके विरोध के नाम पर अभिव्यक्ति की आजादी का दुरुपयोग हो रहा है।
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कीर्ति शुक्ला त्रिवेदी
संयुक्त मंत्री जिला अधिवक्ता संघ
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