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कैंट में रैंकिंग सुधारने की मुहिम, पर शौचालय लगा न दें ‘दाग’

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जनवरी में स्वच्छता परखने आएगी स्वच्छ भारत मिशन की टीम
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बरेली। तीन सालों से चल रहे स्वच्छता सर्वेक्षण में टॉप टेन की रैंक हासिल करने की कैंट बोर्ड की उम्मीद धराशायी हो रही है, लेकिन अबकी बार जनवरी में होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण में टॉप टेन में शामिल होने के लिए कैंट में स्वच्छता सर्वेक्षण में पास होने की कवायद जोरशोर से शुरू हो गई है, लेकिन अफसरों की इस मुहिम पर कैंट के शौचालय ‘दाग’ लगाएंगे।
कैंट के आरए बाजार, सदर बाजार और मदारी की पुलिया के पास बने सार्वजनिक शौचालय गंदगी से पटे हैं। शौचालय का उपयोग करना तो दूर इनके पास से गुजरना भी निवासियों के लिए दूभर है। क्षेत्र के दुकानदार और लोगों का कहना है कि सफाई कर्मियों का डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के बाद शुल्क लेने पर ज्यादा जोर है, जबकि शौचालयों की सफाई से उन्हें कोई सरोकार नहीं। वहीं, शौचालयों की सफाई करने का अनुरोध करने पर भी सफाईकर्मी कोई ध्यान नहीं दे रहे। कई बार मामला बोर्ड की बैठक में उठा, लोगों ने भी शिकायतें कीं लेकिन गंदगी साफ होने के बजाय बढ़ती ही गई। पिछले दिनों बीआई बाजार में कैंट की ओर से बनाए गए मॉडल टॉयलेट की स्थिति भी बदहाल है। यहां दरवाजे जर्जर हो चुके हैं। डिवाइडर भी टूटकर गिर रहे हैं। सफाई न होने से बदबू के बीच ठहरना मुश्किल है। ऐसे में ओडीएफ के हाल का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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जुर्माना लगाने पर आक्रोशित हैं लोग
कैंट में पिछले दिनों अफसरों ने खुले में पेशाब करने पर भी दो सौ रुपये का जुर्माना लगा दिया। एक ओर बदहाल शौचालय तो दूसरी ओर जुर्माने की बंदिश का लोगों ने विरोध किया है। उनका कहना है कि जब शौचालय में ठहरना मुश्किल है तो आखिर लोग ‘कहां’ जाएं। इस मामले में अफसरों ने भी चुप्पी साध रखी है।
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कैंट के शौचालयों की स्थिति बेहद खराब है, लेकिन अफसर इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे। कई बार लोगों की शिकायतों को अफसरों के सामने भी रखा, लेकिन उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। बिना सुविधा दिए जुर्माना वसूलने का नियम सही नहीं। - शिखा नायर, उपाध्यक्ष, कैंट बोर्ड
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