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‘गोवंश पालन को उद्योग का दर्जा देने की सरकार कर रही कवायद’

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गोमूत्र कलेक्शन सेंटर खोलने की योजना, मार्च में शुरू होगा पशु भ्रूण प्रत्यारोपण संस्थान
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बरेली। ‘गोवंश पालन सिर्फ दूध बिक्री कर मुनाफा कमाने की मंशा से कभी सफल नहीं हो सकता है। दूध से घी, मक्खन, छाछ, मावा आदि के अलावा वैज्ञानिक तकनीक से गोमूत्र और गोबर की भी बिक्री होगी तभी अच्छा मुनाफा होगा।’ यह कहना है राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष डॉ. वल्लभ कथीरिया का। उन्होंने कहा कि सरकार गोवंश पालन को उद्योग के रूप में विकसित करने के लिए प्रयासरत है। इसके लिए बड़े स्तर पर शोध भी हो रहे हैं। जल्द ही जिलों में गोमूत्र कलेक्शन सेंटर खोले जाएंगे। गोमूत्र में कई बीमारियों को जड़ से खत्म करने की अद्भुत क्षमता होती है।
विकास भवन स्थित अहिच्छत्र सभागार में पत्रकारों से बात करते हुए डॉ. वल्लभ ने बताया कि गोसंरक्षण के उद्देश्य से सरकार ने राष्ट्रीय कामधेनु आयोग का गठन किया है। इसका मकसद गोहत्या रोक कर आधुनिक तकनीक के जरिए गायों से प्राप्त होने वाले पदार्थों को संशोधित, परिष्कृत कर उन्हें औद्योगिक उत्पाद के रूप में तैयार कर बाजार में उपलब्ध कराना है। इसीलिए आवारा गायों को पकड़कर फिलहाल अस्थायी गोशालाओं में उनका संरक्षण किया जा रहा है। यहां से गायों को सुपुर्दगी देकर लोगों को गोवंश पालन से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए रासायनिक खाद से सब्सिडी खत्म कर जैविक खेती करने वालों के खातों में सब्सिडी भेजने की भी केंद्र सरकार की योजना है।
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देसी नस्ल की गायें पालने को बढ़ावा देगी सरकार
डॉ. वल्लभ ने बताया कि जर्सी गाय दूध भले ज्यादा देती हैं, लेकिन उनके मूत्र, गोबर आदि का उपयोग नहीं किया जा सकता है। शोधों के जरिए पता चला है कि भारतीय नस्ल की देसी गायों के मूत्र और गोबर में अधिक गुण होते हैं, इसलिए अच्छी भारतीय नस्ल की गायों को बढ़ावा देने के लिए कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों पर गर्भाधान भी कराया जाएगा। गायें बछिया को ही जन्म दें, वैज्ञानिक इस दिशा में सफल प्रयोग कर चुके हैं।

अस्थायी गोशालाओं की दुर्दशा दूर की जाए
पत्रकार वार्ता से पहले समीक्षा बैठक में डॉ. वल्लभ ने अफसरों से पशुपालन और टीकाकरण संबंधी योजनाओं की जानकारी ली। बताया गया कि जिले में करीब आठ लाख पशुओं का हाल ही में टीकाकरण कराया गया है। साथ ही, अस्थायी गोशालाओं में भी सड़कों पर भटक रहे गोवंश को रखा गया है। इस पर डॉ. वल्लभ ने गोशालाओं में सुविधाओं के अभाव पर खासी नाराजगी जताई। उन्होंने आपसी सहयोग से गोशालाओं को बेहतर बनाने अथवा लोगों को जागरूक कर गायों को उनकी सुपुर्दगी में देने के निर्देश दिए। बता दें कि शुक्रवार को अमर उजाला ने अस्थायी गोशालाओं की दुर्दशा पर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की। इसका संज्ञान लेते हुए डॉ. वल्लभ ने अफसरों को निर्देशित किया है।
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मार्च में शुरू हो जाएगा भ्रूण प्रत्यारोपण संस्थान
बहेड़ी में प्रस्तावित मेगा फूड पार्क में 50 एकड़ भूमि पर 28 करोड़ की लागत से बन रहा पशु भ्रूण प्रत्यारोपण संस्थान मार्च में शुरू होने का अफसरों ने दावा किया है। डॉ. वल्लभ ने इस बाबत पूछा तो आईवीआरआई और पशुपालन विभाग के अफसरों ने बताया कि संस्थान का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। डॉक्टरों की तैनाती प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। अगले साल मार्च में संस्थान चालू हो जाने की उम्मीद है। संस्थान में सीमन स्टॉक को अत्याधुनिक लैब, अच्छे आहार को मिक्सिंग प्लांट, कृत्रिम गर्भाधान औैर पशुओं का चारा उगाने के लिए फार्म की सुविधा रहेगी।
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