नहरों की सफाई कर टेल तक पानी पहुंचाने के प्रमुख सचिव ने दे रखें हैं सख्त निर्देश
बरेली। नहरों में सिल्ट सफाई कर टेल तक पानी पहुंचाने की कार्ययोजना तीन माह बाद भी धरातल पर नहीं उतर सकी है। नहरों की सिल्ट सफाई में खानापूर्ति की मिल रही शिकायतोें पर सीडीओ ने रिपोर्ट तलब की तो आंकड़े चौंकाने वाले मिले। प्रमुख सचिव के सख्त निर्देश के बावजूद अब तक 60 फीसदी नहरों में सिल्ट जमी हुई है। वहीं शेष 40 फीसदी में सिल्ट सफाई की रिपोर्ट पर किसानों ने सवालिया निशान लगाए हैं। नियमानुसार जिन राजवाह और अल्पिका की सिल्ट सफाई का दावा विभाग ने किया है, सीडीओ ने उनके साक्ष्यों समेत सत्यापन के निर्देश दिए हैं। इससे विभाग में खलबली मची हुई है।
पिछले दिनों प्रमुख सचिव की समीक्षा बैठक में नहरों की सिल्ट सफाई की रफ्तार सुस्त मिलने पर डीएम को मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। डीएम ने भी सिल्ट सफाई के मामले पर जिम्मेदारों के पेच कसे तो अफसरों ने आनन-फानन में नहरों की सिल्ट सफाई का कार्य शुरू कराया। मगर किसानों ने इसमें बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा की आशंका जताई। उनका कहना था कि विभाग ने जल्दबाजी में सिल्ट सफाई के प्रस्ताव में पुलिया निर्माण और मरम्मत का बजट शामिल नहीं किया। लिहाजा, किसानों ने पानी के खेतों तक पहुंचने की संभावना पर सवाल उठाया था। अमर उजाला ने इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया तो हड़कंप मच गया। सीडीओ सत्येंद्र कुमार ने प्रगति रिपोर्ट तलब की तो जिम्मेदारों के हाथ पांव फूल गए। अब अफसरों ने भी जो रिपोर्ट सौंपी है, वह और भी हैरान करने वाली है। इसमें बैगुल प्रणाली की सभी राजवाह और अल्पिका की सफाई कार्य पूर्ण होने का दावा किया है, जबकि रुहेलखंड, शारदा प्रणाली में अभी काफी काम बचा हुआ है।
सत्यापन में खुलेगा ‘कार्य प्रगति’ का राज
सीडीओ की ओर से सत्यापन के निर्देश दिए जाने के बाद अब विभाग में खलबली मची हुई है। दरअसल, जिन नहरों की सफाई का कार्य प्रगति पर बताया जाता है, उनमें से ज्यादातर नहरों पर सिल्ट सफाई का काम अभी शुरू ही नहीं हुआ है, जबकि कार्य में तेजी दिखाने के लिए अफसर ‘कार्य प्रगति पर’ लिखकर राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। अब सत्यापन रिपोर्ट में वास्तविक स्थिति का खुलासा होने पर गाज गिरने की आशंका जताई जा रही है।
रबी फसली वर्ष 2019-20 में अब तक नहरों की सिल्ट सफाई का डाटा
रुहेलखंड प्रणाली: नहर में सिल्ट सफाई के लिए 92.11 लाख रुपये का बजट आवंटित हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार द्वितीय उपखंड के तहत राजवाह बरौर नहर, कुल्ली नहर, वल्ली नहर, बैरम नगर में सिल्ट सफाई हो चुकी है, जबकि दौलतपुर, दांया पहा, शेरगढ़, शरीफनगर, धौंरा, हसनपुर, बहेड़ी नहरों की सिल्ट सफाई का कार्य अपूर्ण है, जबकि प्रथम उपखंड के दांया पहा और मुख्य पहा की सिल्ट सफाई हो चुकी है। द्वितीय उपखंड की अल्पिका रास, ढकिया, नंदपुर, सिंधौरा, रामनगर, दमखोदा, अनुरुद्धपुर, सियाठेरी, सकरस की सिल्ट का कार्य पूर्ण और गुरभोज, मुडिया, रम्पुरा, मसमासी का कार्य अपूर्ण है। प्रथम उपखंड की अल्पिका सिरसा, शहदोरा में सिल्ट सफाई हो गई है। वहीं, द्वितीय उपखंड की अल्पिका गुलमोहम्मदपुर, खिरनी, नरकुंडा का कार्य पूरा और सियोठेरी, सकरस, खमरिया, गहलुइया, भोगपुर, कनमन, तेजनगर, हाफिजगंज, शाहपुर, बीथम, जगनडांडी, पुरैनाताल की सिल्ट सफाई नहीं हुई है।
बैगुल प्रणाली: सिल्ट सफाई के लिए 51.25 लाख रुपये का बजट आंवटित हुआ। रिपोर्ट के अनुसार प्रथम उपखंड के तहत बरा नहर, सावेपुर, बायां और दायां उंगनपुर, फरदिया, सिंगौली, बहादुरपुर, महोलिया, सिसैया, भुड़िया, कंठगरी, अजीतपुर, कथरिया, हरहरपुर में सिल्ट सफाई का कार्य पूरा होने की रिपोर्ट सौंपी गई है।
शारदा प्रणाली: सिल्ट सफाई के लिए 125 लाख का बजट आवंटित हो चुका है। रिपोर्ट के अनुसार तृतीय और चतुर्थ उपखंड के तहत बायां चुरैली, रजऊ, बायां ग्रेम का कार्य अपूर्ण और बरेली, शाही, अगरास, कुम्हरा, बझेड़ा का कार्य अभी अपूर्ण है। इन्हीं उपखंड के तहत अल्पिका मुडिया का कार्य अपूर्ण और चठिया, वीरपुर, मझौआ, कल्याणपुर, मकरंदपुर, अहमदाबाद, धर्मपुर, धारूपुर, ढढरुआ, किशनपुर, हरदुआ, सरकंडा का कार्य पूर्ण हो चुका है।