संतोष बोले- कारोबारी शहर में कवि का स्मारक दिलचस्प मगर डंगवाल जी की शख्सियत ही ऐसी
पूर्व सांसद ऐरन ने कहा- महान कवि होने के बाद भी सहजता-सरलता थी डंगवाल जी की विशिष्टता
बरेली। साहित्यकार और प्रख्यात कवि वीरेन डंगवाल के हेड पोस्ट ऑफिस रोड पर बने स्मारक का रविवार को केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने प्रख्यात साहित्यकार लक्ष्मण सिंह बिष्ट ‘बटरोही’ के साथ लोकार्पण किया। बटरोही ने कहा कि वीरेन डंगवाल की लेखन और कथन की शैली का सभी साहित्यकारों ने लोहा माना है। यह शैली इतनी विशिष्ट थी कि इसकी कोई नकल भी नहीं कर सकता।
स्मारक के लोकार्पण के बाद नेहरू युवा केंद्र सभागार में आयोजित स्मृति सभा में बतौर मुख्य अतिथि लक्ष्मण सिंह बिष्ट ‘बटरोही’ ने वीरेन डंगवाल के कई संस्मरण साझा किए। उन्होंने कहा कि वीरेन डंगवाल की एक खासियत यह भी थी कि वह अपने बारे में चर्चा या प्रशंसा को कभी स्वीकार नहीं करते थे। प्रचार से भी हमेशा दूर रहे। कविता को ऐसी शैली में पिरोते थे कि उसे किसी भी स्थानीय क्षेत्र के साथ जोड़ा जा सकता था। अपनी कविता को उन्होंने खुद किसी पत्रिका में प्रकाशित कराने का भी प्रयास कभी नहीं किया।
केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने कहा कि बरेली जैसे कारोबारी शहर में किसी कवि का स्मारक एक दिलचस्प बात है लेकिन वीरेन डंगवाल की शख्सियत वाकई इसकी हकदार है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह स्मारक बरेली की साहित्य पहचान को भी कायम रखेगा। कहा, वीरेन जी ऐसे साहित्यकार थे जिन्होंने बरेली को दूर-दूर तक पहचान दी। पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन ने भी कई संस्मरण सुनाते हुए कहा कि वीरेन डंगवाल व्यक्तित्व के धनी थे। महान कवि होने के बाद भी उनके व्यक्तित्व पर इसका असर कभी नहीं दिखा। सभी से सहजता और सरलता से मिलना उनकी पहचान थी। समाजसेवी जेसी पालीवाल ने बताया कि वीरेन दा की पहचान बरेली ही नहीं विदेशों में भी थी। बाहर से आने वाले साहित्यकार या रंगकर्मियों से बातचीत से ही उनकी साख का पता चलता है। फिर भी उन्होंने खुद को हमेशा छुपाकर रखा।
वीरेन डंगवाल की पत्नी रीटा डंगवाल ने स्मृति सभा में उनकी एक कविता सुनाई। बहन बीना डंगवाल ने स्मारक को सम्मान का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह स्मारक बरेली ही नहीं दूसरे शहरों को भी प्रेरणा देगा। कार्यक्रम में पूर्व मेयर सुप्रिया ऐरन, राधाकमल सारस्वत, कहानीकार सुकेश साहनी, योगेंद्र आहूजा, अशोक पांडेय, प्रो. एके सिन्हा, कविता भारत, रजनीश वर्मा, आशुतोष कुमार, सुधीर विद्यार्थी आदि ने हिस्सा लिया और डंगवाल जी से जुड़े संस्मरण भी सुनाए।