बरेली। जिले की दो प्रतिभावान बेटियां सृष्टि और अंजलि ने तमाम आर्थिक तंगी, शारीरिक चोटों और सामाजिक बाधाओं को मात देकर खेल जगत में एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। अपनी अटूट लगन और कड़े परिश्रम के दम पर इन दोनों ने राष्ट्रीय पटल पर अपनी एक खास जगह बनाई है।
सृष्टि का लक्ष्य भारतीय टीम में जगह बनाना
मिठाई कारीगर बृजेश कुमार और गृहिणी रेखा कुमारी की बेटी सृष्टि ने मुश्किल हालात के बावजूद हॉकी के प्रति अपना जुनून बनाए रखा। एथलेटिक्स से शुरुआत करने के बाद, मैदान में अन्य बच्चों को खेलता देख वे हॉकी से जुड़ीं। स्कूल के बाद स्टेडियम में घंटों अभ्यास कर उन्होंने तीन नेशनल और तीन रीजनल टूर्नामेंट में हिस्सा लिया। केंद्रीय विद्यालय की ओर से खेलते हुए सृष्टि ने अंडर-14 और अंडर-17 नेशनल में कांस्य पदक हासिल किए हैं। बार-बार चोटिल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। अब उनका मुख्य उद्देश्य ओपन नेशनल में शानदार प्रदर्शन कर भारतीय हॉकी टीम में जगह बनाना है।
गांव की पगडंडी से नेशनल ट्रैक तक अंजलि का सफर
शहर निवासी की अंजलि यादव ने नंगे पैर चकरोड पर दौड़कर एथलेटिक्स में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। गैस एजेंसी में कार्यरत उनके पिता जगदीश सिंह ने सीमित साधनों के बावजूद अपनी बेटी के सपने का पूरा समर्थन किया। टीवी पर एशियन गेम्स देखकर एथलीट बनने का सपना पूरा करने के लिए अंजलि ने नवंबर 2025 में अलीगढ़ स्टेडियम से ट्रेनिंग शुरू की। जून 2026 से वह बरेली के सिंथेटिक ट्रैक पर रोजाना पांच-छह घंटे कड़ा अभ्यास कर रही हैं। प्रयागराज फेडरेशन कप में 100 मीटर हर्डल्स में कांस्य और जयपुर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में 100 व 200 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीतने के बाद, अब अंजलि का अगला लक्ष्य आगामी सितंबर जूनियर नेशनल में जीत दर्ज करना है।