बरेली। थिएटर की दुनिया में आगे बढ़ने के लिए शहर के युवा जीतोड़ मेहनत कर रहे हैं। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय या भारतेंदु नाट्य अकादमी में प्रवेश लेकर भी अपना भविष्य संवार रहे हैं। युवाओं का कहना है कि थिएटर में अभिनय करना एक कला है। अच्छे संस्थानों में पढ़ाई के बाद कॅरिअर के लिए नई राहें खुल जाती हैं। थिएटर में मेहनत अधिक है। कामयाबी मिलने में समय भी लगता है, इसलिए बहुत कम लोग इस विधा में आगे बढ़ते हैं।
फिल्मों में आजमा रहीं हाथ
बदायूं रोड की निवासी शिल्पी भारतेंदु नाट्य अकादमी से पढ़ाई के बाद इन दिनों मुंबई व कोलकाता के थिएटरों से जुड़ी हैं। साथ ही, वह फिल्हों व टीवी में भी हाथ आजमा रही हैं। उनका कहना है कि छोटे शहरों में थिएटर को पर्याप्त दर्शक नहीं मिल पा रहे हैं, लेकिन इससे कलाकारों के हौसले कम नहीं होते।
एनएसडी में प्रवेश के लिए प्रयासरत
वर्ष 2021 से थिएटर से जुड़े जोगी नवादा के स्पर्श नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) में प्रवेश लेने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल के दौरान ही वह अभियन की ओर आकर्षित रहे। इसलिए इसी में कॅरिअर बनाने की ठान ली। परिवार को यह पसंद नहीं था, लेकिन बाद में वह सहमत हो गए।
छह साल से अभिनय में आजमा रहे हाथ
पीलीभीत बाइपास निवासी मुनीश रत्न ने बताया कि छह साल से अभिनय कर रहे हैं। बीकानेर और धर्मार्थ थिएटर फेस्टिवल में अभिनय किया है। जब भी थिएटर जाता हूं, स्वयं को खुद के और निकट पाता हूं। हमें भावों को केवल कैमरे के लिए नहीं, बल्कि अपने लिए महसूस करना होता है। इससे भाव निखर जाते हैं।
एनएसडी में दिया है टेस्ट
बदायूं रोड के रहने वाले शोभित भी थिएटर में अपना कॅरिअर बनाना चाहते हैं। वह बताते हैं कुछ दिन पहले ही एनएसडी का टेस्ट देकर आए हैं। थिएटर एक बड़ी बारीक विधा है। थिएटर भी सामान्य कॅरिअर की तरह है। इसमें लोग आठ-दस साल की मेहनत के बाद ही मुकाम पा सकते हैं।