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अवैध खनन प्रकरणः अनुमति निरस्त, 17 लाख का जुर्माना

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पीलीभीत। किसान के नाम पर अनुमति लेकर खेत से अवैध तरीके से बालू का खनन करने के मामले में जिला प्रशासन ने 17 लाख का जुर्माना ठोकते हुए बालू खनन की अनुमति को निरस्त कर दिया है। इस मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
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बीसलपुर के गांव ढुकसी मेें एक किसान के खेत में देवहा नदी से आई बालू को हटाने के लिए उसके नाम से आवेदन किया गया था। आवेदन पर लेखपाल की जांच रिपोर्ट लगने के बाद चार उच्चाधिकारियों की रिपोर्ट एक ही दिन में लगाते हुए खनन का अनुमति पत्र जारी कर दिया गया था। बालू खनन पर शुरू में तो गांव के लोगों ने ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब एक-एक दिन में पोकलैंड और जेसीबी मशीन की मदद से आनन फानन में बड़ी मात्रा में खनन शुरू कर दिया गया तो मामला चर्चा में आ गया। पता चला कि किसान के नाम पर अनुमति लेकर एक माफिया ने यह सब कुछ किया। माफिया ने किसान के खेत के अलावा नदी के किनारों और सरकारी जमीन पर बहकर आई बालू की भी मशीनों से खुदाई करा ली थी।
सात और आठ जनवरी के अंक में अमर उजाला द्वारा यह मामला प्रमुखता से प्रकाशित होने पर आठ जनवरी को ही खनन पर रोक लगा दी गई। बाद में बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा ने प्रभारी मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के सामने मामला उठाया तो एडीएम न्यायिक से जांच कराई गई। उनकी गोपनीय रिपोर्ट मिलने के बाद डीएम ने शुक्रवार को मामले को पूरी तरह अवैध खनन का पाते हुए करीब 17 लाख का जुर्माना लगाते हुए खनन निकासी की अनुमति निरस्त कर दी।
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डीएम के निर्देश पर ढुकसी में खनन मामले की जांच की गई थी। जांच रिपोर्ट में मैंने करीब 17 लाख का जुर्माना लगाने और अनुमति निरस्त करने की संस्तुति की थी। अब इसका आदेश भी जारी हो चुका है। -देवेंद्र प्रताप मिश्र, एडीएम न्यायिक
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