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सौहार्द की मिसाल: बरेली में है चुन्ना मियां का मंदिर... ब्राह्मण परिवार कर रहा मस्जिद की देखभाल

Sat, 17 Jan 2026 05:27 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

बरेली शहर की गलियों में गंगा-जमुनी तहजीब की निशानियां जीवंत है। शहर के कटरा मानराय मोहल्ले में चुन्ना मियां का मंदिर है। इसे हिंदू मुसलमानों ने मिलकर बनवाया था। वहीं ब्राह्मण परिवार तीन पीढ़ियों से मस्जिद की देखभाल कर रहा है
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हिंदू और मुसलमानों ने मिलकर बनवाया था ये मंदिर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली शहर का मिजाज दूसरों से अलग हैं। यहां सात नाथ हैं तो सुन्नी मुसलमानों का सबसे बड़ा मरकज दरगाह आला हजरत भी है। गुरुद्वारों के साथ ही इस शहर में कई गिरजाघर भी हैं। यहां मुस्लिम सेठ ने मंदिर बनवाकर मिसाल पेश की तो ब्राह्मण परिवार तीन पीढ़ियों से मस्जिद की देखभाल कर रहा है। मिश्रित इलाकों में रहने वाले परिवार हिंदू-मुस्लिम का भेदभाव भुलाकर एक-दूसरे के सुख-दुख में शरीक होते हैं।

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सुभाषनगर के पुरवा बब्बन खां मोहल्ले में चार सौ परिवार रहते हैं। यहां हिंदू-मुस्लिम मिलकर त्योहार मनाते हैं। राशिम खान और राजेंद्र तिक्खा ने बताया कि होली, दिवाली हो या ईद, उनके मोहल्ले में सब एक-दूसरे के साथ मनाते हैं। रक्षाबंधन और भैया दूज पर यहां अनोखा नजारा दिखता है। भीमसेन भाटिया, समयुन खान, रजत भाटिया, सलाम अहमद, नसीर अहमद खां, अब्बास वेग, सुधीर ओलावर ऐसे मौकों पर सक्रिय भूमिका निभाते हैं। 

पुरानी बस्ती खन्नू मोहल्ले में रहने वाले परिवारों का भी यही हाल है। इतिहास के पन्नों को पलटें तो बास देव-बरल देव यहां के राजा रहे। उन्हीं के नाम पर शहर और जिले का नामकरण हुआ। उन्होंने दरगाह हजरत शाहदाना वली की बाउंड्री कराई थी। दरगाह के प्रशासक अब्दुल वाजिद खां उर्फ बब्बू मियां इसकी पुष्टि भी करते हैं। नवाब खान बहादुर खान के वंशज लियाकत खान बताते हैं कि नवाब ने अपने सेनापति मानराय के नाम से यहां बाजार भी बसाया था जो कटरा मानराय के नाम से प्रसिद्ध है।

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चुन्ना मियां का मंदिर 
कटरा मानराय मोहल्ले में चुन्ना मियां का मंदिर है। इसे हिंदू मुसलमानों ने मिलकर बनवाया था। इस मंदिर में लक्ष्मी-नारायण की मूर्तियां स्थापित हैं। इसलिए इसे लक्ष्मी-नारायण मंदिर भी कहा जाता है। यहां के बड़े बीड़ी व्यापारी रहे सेठ फजलुर रहमान उर्फ चुन्ना मियां ने इस मंदिर के लिए अपनी जमीन दी थी। 16 मई 1960 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसका उद्घाटन किया था। चुन्ना मियां के पौत्र शमसुल रहमान ने बताया कि उनके दादा ने इस मंदिर के लिए श्रमदान भी किया था। अब भी मौके मौके पर उनके परिवार के लोग मंदिर जाते हैं।
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