फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चिन्मयानंद प्रकरणः दुष्कर्म पीड़ित छात्रा ने दिया बैक पेपर, बाकी परीक्षा में बैठाने से विवि का इनकार

Tue, 26 Nov 2019 06:13 AM IST
बरेली ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
विज्ञापन
परीक्षा देकर लौटती छात्रा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री चिन्मयानंद पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली एलएलएम की छात्रा को रुहेलखंड विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोमवार को बैक पेपर दिलाने के बाद आगे की परीक्षा में बैठाने से इनकार कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि छात्रा की उपस्थिति 75 फीसदी से कम है, लिहाजा उसे परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस संबंध में विश्वविद्यालय को कोर्ट से कोई निर्देश भी नहीं मिला है।

विज्ञापन


 चिन्मयानंद से पांच करोड़ रुपये की ब्लैकमेलिंग के मामले में छात्रा जेल में है। छात्रा सुबह करीब आठ बजे पुलिस अभिरक्षा में रुहेलखंड विवि पहुंची। सुबह नौ बजे से उसका बैक पेपर था। कोर्ट का आदेश मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रा को परीक्षा में शामिल कर लिया।

इस बीच विशेषज्ञों ने कोर्ट के आदेश का गहराई से अध्ययन किया और परीक्षा देने के बाद छात्रा को पूरी स्थिति से अवगत कराते हुए एलएलएम थर्ड सेमेस्टर की परीक्षा में शामिल करने से इनकार कर दिया।
विज्ञापन


न फॉर्म फॉरवर्ड हुआ, न प्रवेश पत्र जारी
कोर्ट के आदेश पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रा को एडमिशन तो दे दिया था, लेकिन 75 प्रतिशत उपस्थिति पूरी न होने के कारण उसका फॉर्म परीक्षा विभाग को फॉरवर्ड नहीं किया। इस वजह से उसका प्रवेश पत्र भी जारी नहीं हुआ। छात्रा को बता दिया गया है कि इस स्थिति में उसे परीक्षा की अनुमति तभी दी जा सकती है, जब कोर्ट विश्वविद्यालय को परीक्षा दिलाने का विशेष आदेश जारी करे।

परीक्षा के बाद भी पास होने की उम्मीद नहीं
सूत्रों का कहना है कि अगर कोर्ट के आदेश पर छात्रा को परीक्षा देने की अनुमति मिल जाती है तो भी उसके पास होने की उम्मीद नहीं है। क्योंकि, तीनों विषय में 20-20 नंबर की इंटरनल परीक्षा न देने के कारण उसके शून्य अंक हैं। इसके अलावा छात्रा ने डिजर्टेशन भी नहीं दिया है, जिसके 200 अंक होते हैं।

जेल प्रशासन से कहा- छात्रा को न भेजें
जेल प्रशासन को सूचना भेजी गई है कि छात्रा को अन्य परीक्षा के लिए विश्वविद्यालय न भेजें। उपस्थिति पूरी न होने के कारण उसे परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई है। हालांकि छात्रा के पिता ने हाईकोर्ट जाने की बात कही है लेकिन जब तक विश्वविद्यालय को कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिलेगा, छात्रा को आगे की परीक्षा नहीं दिलाई जा सकती है।
विज्ञापन

- डॉ. सुनीता पांडेय, कुलसचिव, रुहेलखंड विवि

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें