शाहजहांपुर। चिन्मयानंद और छात्रा प्रकरण में एसआईटी ने पूछताछ के लिए एक बार फिर धरपकड़ शुरू कर दी है। शनिवार देर शाम एसआईटी और कोतवाली पुलिस एक भाजपा नेता के घर पहुंची। नेता का लैपटॉप व पैन ड्राइव कब्जे में लेकर लौट गई। सूत्रों के मुताबिक दो दिनों से उनसे पूछताछ भी की जा रही है था। शुक्रवार को छात्रा के माता-पिता और एसएस लॉ कॉलेज से जुड़े लोगों को बुलाकर पूछताछ की गई थी।
आठ नवंबर को हाईकोर्ट में चिन्मयानंद की जमानत अर्जी पर बहस होनी है। इससे पहले एसआईटी पूरे सबूत जुटाने की कोशिश में है। शनिवार को दिनभर मुमुक्षु आश्रम के पास नाले में सबूत खंगाले गए। शनिवार रात तक एसआईटी ने आरोपी संजय की एक नजदीकी रिश्तेदार से पूछताछ की। इसके बाद संजय के एक अन्य करीब रिश्तेदार से पूछताछ हुई। रात में करीब 11 बजे एसआईटी और कोतवाली पुलिस कचहरी रोड पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस के पास रहने वाले भाजपा नेता के घर पहुंची। उस वक्त भाजपा नेता घर पर नहीं थे। उनकी पत्नी और बच्चे मौजूद थे। कोतवाली पुलिस ने भाजपा नेता का लैपटॉप मांगा, जिसे उनके एक रिश्तेदारी ने कहीं से लाकर दिया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक भाजपा नेता को एक दिन पहले ही पूछताछ के लिए बुला लिया था, जिनसे लगातार पूछताछ जारी है।
दरअसल एसआईटी को छात्रा को वो चश्मा और कैमरा चाहिए, जिससे चिन्मयानंद का मालिश के दौरान अश्लील वीडियो बनाया गया था। एसआईटी को जब छात्रा राजस्थान में मिली थी, तब भाजपा नेता की लोकेशन भी राजस्थान में थी। हालांकि भाजपा नेता का कहना था कि वह छात्रा की मदद के लिए गए थे।
चिन्मयानंद केस में विरोधी गुट की भूमिका पहले से चर्चित
शाहजहांपुर। छात्रा से दुष्कर्म मामले में एक नेता और उनके खास चहेते की भूमिका महानगर में पहले से चर्चित है। छात्रा और उसके तीन अन्य साथियों से राजस्थान में नेता के इसी चहेते की खास मुलाकात हुई थी। चर्चा यह भी हुई कि चहेते ने डबल गेम खेलने के लिए चिन्मयानंद पर लगाए गए आरोप वापस लेने के ऐवज में आरोपियों से लाखों की डील भी कर ली, लेकिन अचानक सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले का सीधे संज्ञान ले लिए जाने से नेता के चहेते की सारी प्लानिंग बिगड़ गई।
चिन्मयानंद केस से सत्ता पक्ष की राजनीति में आए भूचाल को शुरू से भाजपा की गुटबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है। इसे बढ़ावा तब मिला, जब सूबे में योगी सरकार बनी। चिन्मयानंद ने मुख्यमंत्री को गुरु भाई कहा और उनसे उसी के अनुरूप सम्मान भी पाया। उनकी मुख्यमंत्री से निकटता ने जिले के कद्दावर नेता और उनकी टोली को उनके आगे बौना कर दिया। गत वर्ष मुमुक्षु आश्रम आए मुख्यमंत्री ने चिन्मयानंद केे साथ भोजन किया। यही नहीं, गत अप्रैल में नवादा दरोबस्त आए मुख्यमंत्री के कार्यक्रम मेें कद्दावर चेहरे दूसरी पायदान पर रहे। इसी खुन्नस में चिन्मयानंद के साथ कद्दावर नेता के बीच मनभेद और गहरे हो गए।
यही वजह रही कि फिरौती के फरार आरोपियों से राजस्थान जाकर मिलने की चर्चा फैली तो नेता के चहेते को सफाई देनी पड़ी कि वह तो चिन्मयानंद की खातिर उन सबको मनाकर वापस लाने गए थे। इसके विपरीत चिन्मयानंद गुट के लोगों का मानना है कि नेता के चहेते ने राजस्थान दौरा उनके खिलाफ साजिश की अगली पटकथा लिखने के लिए किया था। अब शायद एसआईटी भी जानना चाहती है कि आरोपियां से राजस्थान जाकर मिलने के पीछे क्या मंशा रही।