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सीजेएम ने कहा- फिरौती के आरोपियों पर गैगस्टर एक्ट लगाना कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं

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शाहजहांपुर। एलएलएम छात्रा से दुष्कर्म के आरोप में जेल में बंद पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद से पांच करोड़ की फिरौती मांगने के आरोपियों पर गैंगेस्टर एक्ट लगाने के मामले में दिए गए प्रार्थना पत्र का मंगलवार को सीजेएम कोर्ट ने निस्तारण कर दिया। सीजेएम ओमवीर सिंह ने कहा कि गैंगेस्टर संबंधित मामला सीजेएम कोर्ट के अधिकारक्षेत्र में नहीं है। साथ ही पूछा कि यह प्रार्थना पत्र किस प्रावधान के तहत दिया गया।
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दुष्कर्म पीड़ित छात्रा और उसके साथी संजय ने चिन्मयानंद को मैसेज भेजकर पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी थी। इस मामले में एसआईटी ने आरोपी छात्रा एवं उसके तीनों दोस्त, संजय, सचिन और विक्रम सिंह उर्फ दुर्गेश को गिरफ्तार कर जिला जेल भेजा था। चिन्मयानंद की ओर से सीजेएम कोर्ट में आरोपियों पर गैंगेस्टर लगाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया था। उनकी वकील पूजा सिंह की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र पर अधिवक्ता मनेंद्र सिंह ने बहस की। कहा कि आरोपियों ने रकम के लालच में चिन्मयानंद पर झूठे आरोप लगाकर उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया। फिरौती मांगने की योजना छात्रा और उसके साथियों ने मिलकर बनाई। इसलिए आरोपियों पर गैंगेस्टर लगाना उचित होगा। पीड़ित पक्ष के वकील कलविंदर सिंह, वकील प्रमोद तिवारी ने कहा कि यह प्रकरण कई चरण आगे बढ़ चुका है और एसआईटी की विवेचना भी पूरी नहीं हुई। इस लिए गैंगेस्टर लगाने का प्रार्थना पत्र न्यायालय के स्वीकार करने योग्य नहीं है। सीजेएम ने बहस के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया था। मंगलवार को सीजेएम ओमवीर सिंह ने अपना फैसला सुनाते हुए पत्रावली का निस्तारण किया। सीजेएम कोर्ट ने कहा कि आवेदक द्वारा किस प्रावधान के तहत यह प्रार्थना पत्र दिया गया। गैंगेस्टर से संबंधित मामले सीजेएम कोर्ट के अधिकारक्षेत्र में नहीं है।
गैंगेस्टर एक्ट लगाने को विवेचक की संस्तुति जरूरी
सेंट्रल बार के सचिव दिनेश चंद्र मिश्रा ने बताया कि गैंगेस्टर एक्ट लगाने के मामले में विवेचक की संस्तुति जरूरी है। विवेचना रिपोर्ट के आधार पर पुलिस अधीक्षक गैंगेस्टर एक्ट लगाने का अनुमोदन करते हैं। उसी के आधार पर डीएम की स्वीकृति पर गैंगेस्टर एक्ट लगाया जाता है।
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