बरेली। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद वहां गतिविधियां और कारोबार दोनों प्रभावित हुए हैं। इसके चलते वहां होने वाली मेवा (ड्राई फ्रूट्स) की उपज भी अस्तव्यस्त हो गई है। इससे यूपी समेत पूरे देश में कश्मीरी मेवा की सप्लाई न के बराबर हो गई। दिवाली पर ड्राई फ्रूट्स की मांग पूरी करने के लिए बाजारों में विदेशी मेवा का प्रचलन बढ़ गया है। अमेरिका, अफगानिस्तान और चिली से आयातित मेवा बाजार में छाई हुई है।
जम्मू-कश्मीर से दशहरा से पहले ही अखरोट, बादाम, केसर, खुमानी, अनार, सेब समेत कई मेवा और फल आना शुरू हो जाते थे। इनकी फसल तैयारी के बीच ही वहां अनुच्छेद 370 हटाया गया था। इससे नाराज वहां उपद्रवी और अलगाववादियों ने किसानों को परेशान किया। लिहाजा वहां से होने वाला ड्राई फ्रूट्स का कारोबार भी चौपट हो गया। इसका असर बरेली समेत सभी शहरों पर पड़ा है। सस्ता और स्वादिष्ट मेवा वहां से आना लगभग ठप हो गया है। इसका फायदा अफगानिस्तान, चिली और अमेरिका के कारोबारियों ने उठाया है। उन्होंने मांग के अनुरूप भारतीय बाजार में बडे़ पैमाने पर अपने यहां के ड्राई फ्रूट्स उतार दिए हैं।
चिलगोजा गिरी भी उपलब्ध
कंधार और अफगानिस्तान की किशमिश, अंजीर, चिलगोजा गिरी इस समय ग्राहकों को लुभा रही है। कारोबारी बताते हैं कि गिरी बाजार में पहली बार आई है। अफगानी मामरा बादाम, चिली का अखरोट, ईरान का छुआरा से बाजार पटा हुआ है। पाकिस्तान से रिश्ते खराब होने के बाद छुआरा 60 की जगह ढाई सौ रुपये किलो बिकने लगा है। इसकी जगह ईरान का पौने चार सौ रुपये प्रति किलो वाला छुआरा ज्यादा पसंद किया जा रहा है।
मिठाई की जगह ड्राईफ्रूट गिफ्टपैक लोगों की पसंद बने
मिलावटी मिठाइयों से बचने के लिए लोगों की पहली पसंद अब ड्राई फ्रूट पैक बन गए हैं। मिठाई विक्रेता भी ड्राई फ्रूट पैक बेचने को मजबूर हैं। यानी मिठाइयों का विकल्प मेवा बन गया है। विभिन्न डिजाइनों में ड्राईफ्रूट्स के आकर्षक गिफ्ट पैक बाजार में उपलब्ध हैं। इसके साथ ही बेकरी और नमकीन भी बाजार भी मिठाई को पीछे धकेलने में सहायक हो रही है।
केसर हुआ सस्ता
बाजार में एक ग्राम केसर अभी तक दो सौ से ढाई सौ रुपये में मिलता था। जो इन दिनों डेढ़ सौ रुपये में उपलब्ध है। दरअसल, बड़े कारोबारियों ने केसर का ज्यादा स्टॉक कर लिया है। अब चूंकि केसर की नई उपज आनी शुरू हो रही है, लिहाजा कारोबारी पुराना स्टाक क्लियर कर रहे हैं।