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18 साल से कम उम्र के बच्चे हैं मानव तस्करों के निशाने पर

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मानव तस्करी पर पुलिस लाइंस में हुई बैठक में शामिल पुलिस अधिकारी।
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बरेली। मानव तस्करी और बाल अपराध रोकने के लिए शुक्रवार को पुलिस लाइन में कार्यशाला हुई। इसमें रेंज के चारों जनपद बरेली, पीलीभीत, बदायूं और शाहजहांपुर में तैनात एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) के प्रभारी, महिला थाना प्रभारी के अलावा नेपाल बॉर्डर से सटे थानों के इंस्पेक्टरों ने भाग लिया। कार्यशाला में विशेषज्ञ ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 48 प्रतिशत मानव तस्करी का शिकार 18 से कम उम्र के बच्चे हो रहे हैं।
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मानव सेवा संस्थान के डायरेक्टर राजेश मणि त्रिपाठी ने मानव तस्करी पर रोक, एएचटीयू थानों के कार्य एवं अन्य महत्वपूर्ण बिदुंओं की जानकारी दी। पुलिस कर्मियों को बताया कि मानव तस्करी तीसरे नंबर का सबसे बड़ा अपराध है। इस पर रोक के लिए ही एएचटीयू का गठन कर 2015 में प्रदेश के 35 जनपदों में थाने खोले गए। 2020 तक यूपी के सभी जनपदों में एएचटीयू थाने खुल गए। उन्होंने बताया कि 18 साल से कम उम्र के बच्चे मानव तस्करों के निशाने पर रहते हैं। उन्हें तमाम तरह के प्रलोभन देकर फंसाया जाता है। नेपाल से भी किशोर और किशोरियों की तस्करी के मामले सामने आए हैं। इसके लिए नेपाल बॉर्डर से सटे थानों की पुलिस को सतर्क रहने के लिए कहा गया है। कार्यशाला के दौरान आइजी रेंज रमित शर्मा, एसपी देहात राजकुमार अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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