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Bareilly News: जिले के बाल वैज्ञानिक भर रहे नवाचार की उड़ान

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-पर्यावरण संरक्षण, मानव स्वास्थ्य और कृषि पर केंद्रित है विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट
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बरेली। समाज को बेहतर बनाने वाले जिले के बाल वैज्ञानिकों के प्रोजेक्ट राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाने को तैयार हैं। इनके प्रोजेक्ट मॉडल पर्यावरण संरक्षण, मानव स्वास्थ्य और कृषि पर केंद्रित हैं। विश्व विज्ञान दिवस पर प्रस्तुत हैं इन उभरते वैज्ञानिकों के विचार व उनके महत्वपूर्ण नवाचार।

एसी की दूषित वायु का प्रभाव कम करेगी काई
इंद्रानगर निवासी अक्षारिका सक्सेना बीबीएल पब्लिक स्कूल में 12वीं की छात्रा हैं। उन्होंने सहपाठी सात्विक सिंह के साथ मिलकर बायो इंडस्ट्रियल रिवॉल्यूशन प्रोजेक्ट तैयार किया है। इसमें एसी की बाहरी वाली यूनिट से निकलने वाली दूषित वायु को फिल्टर किया जा सकता है। अक्षारिका ने बताया कि सेकेंड्री यूनिट से कार्बन डाइऑक्साइड निकलती हैं। इसे काई (एलगी) की जाली से नियंत्रित किया जा सकता है। जाली से पहले कॉपर की शीट लगाई जाएगी, जिससे काई लंबे समय तक उपयोग में आ सके। अक्षारिका का लक्ष्य सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना है। यह मॉडल बाल विज्ञान प्रदर्शनी में मंडल स्तर प र चयनित किया जा चुका है। संवाद
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खेती में रसायनों को कम करेगा बैक्टिरिया

आनंद विहार निवासी त्रिधा दत्ता बीबीएल स्कूल में 12वीं की छात्रा हैं। उन्होंने जैविक खाद (बायोइनॉक्यूनेंस): किसानों के लिए वरदान प्रोजेक्ट बनाया है। वह बताती हैं कि खेती में रसायन के इस्तेमाल से स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ता है। इसके समाधान के लिए उन्होंने बैक्टिरिया का खेती में इस्तेमाल करने की तकनीक तैयार की है। इसमें किसी हरे-भरे पेड़ की जड़ के पास से मिट्टी एकत्रित की जाती है। बाद में इसे प्रयोगशाला में ले जाकर पानी में मिलाया जाता है। सतह पर बैक्टिरिया आने पर उन्हें अलग करके विकसित किया जाता है। बाद में बड़े स्तर पर बैक्टिरिया को पानी में मिलाकर खेत में डाला जाए तो नाइट्रोजन और फॉसफोरस की मात्रा बढ़ जाती है। इससे उपज अच्छी होती है। इसके लिए प्रयोग भी किया जा चुका है। त्रिधा का लक्ष्य एयरोस्पेस इंजीनियरिंग बनकर देश सेवा करना है। इस प्रोजेक्ट को राज्य स्तर पर चयनित किया जा चुका है।

एक्सपायरी दवाओं के लिए बनाया जाए एकत्रीकरण केंद्र
महानगर निवासी अनीशा कनोत्रा 12वीं (पीसीबी) कक्षा की छात्रा हैं। उनके शोधपत्र डिस्पोजल ऑफ एक्सपायर ड्रग्स : ए नीड ऑफ द आर्स को राष्ट्रीय स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस के लिए चयनित किया गया है। अनीशा ने बताया कि प्रोजेक्ट के लिए उन्होंने पब्लिक सर्वे किया है। घर में अक्सर लोग एक्सपायर दवाओं को कचरे में फेंक देते हैं। ये दवाएं मिट्टी व पानी के साथ रासायनिक क्रिया के जरिए इंसानों और जीव-जंतुओं के शरीर में प्रवेश करके उन्हें प्रभावित कर रही हैं। इसके समाधान के लिए कलेक्शन सिटी सेंटर बनाने व एकत्रीकरण के लिए वेबसाइट तैयार करने का सुझाव दिया गया है। अनीशा जीआरएम स्कूल नैनीताल रोड में पढ़ती हैं।
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प्रदूषण पर लगाम लगाएगा कंट्रोल सिस्टम
आशापुरम स्टेडियम रोड निवासी 10वीं कक्षा के छात्र ध्रुव गुप्ता व उनके सहपाठी रजत गंगवार ने ई-चालान बेस्ड पॉल्यूशन कंट्रोल सिस्टम बनाया है। ध्रुव ने बताया कि वाहन से बड़ी मात्रा में प्रदूषण होता है। अक्सर लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद भी लोग प्रदूषण की जांच नहीं कराते हैं। उन्होंने एक उपकरण डिजाइन किया है, जोकि कंपनी से वाहन के साइलेंसर में सेंसर फिट होकर आए। इसमें स्वत: प्रदूषण के स्तर की जांच होगी। एक मात्रा से अधिक प्रदूषण होने पर चालक को फोन पर चेतावनी का संदेश जाएगा। उसके बाद भी सुधार नहीं करने पर रिपोर्ट ट्रैफिक विभाग के पास जाएगा। यहां से वाहन का चालान कट जाएगा। ध्रुव का लक्ष्य ग्रॉफिक डिजाइनर बनना है। उनका मॉडल राज्य स्तर पर चयनित हो चुका है। वह सेक्रेड हार्ट्स स्कूल के विद्यार्थी हैं। संवाद
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