बरेली। सुभाषनगर इलाके के एक प्लॉट में खुले पड़े पानी भरे सेप्टिक टैंक में डूबकर नौ साल के बच्चे की मौत हो गई। पड़ोसी के टैंक में डूबने के बाद चप्पलें उतराती देखकर साथी बच्चों ने शोर मचाया तो शव को बाहर निकाला गया। परिवार के लोग देर रात बच्चे का शव घर में रखकर विलाप कर रहे थे।
करगैना की ग्रीन वैली कॉलोनी निवासी राजवीर सिंह ऑटो चलाते हैं। मूल रूप से गैनी निवासी राजवीर कुछ साल से यहां मकान बनाकर परिवार के साथ रह रहे हैं। उनका नौ साल का बेटा अनुज कॉलोनी के ही स्कूल में कक्षा दो का छात्र था। सोमवार शाम वह आसपास के बच्चों के साथ घर से दो सौ मीटर दूर पड़ोसी के प्लॉट में खेल रहा था। अंधेरा होने लगा था। तभी साथी बच्चों ने देखा कि अनुज मौके पर नहीं है। उन्होंने आसपास देखा तो प्लॉट के एक छोर पर बने सेप्टिक टैंक में अनुज की चप्पलें उतराती मिलीं।
इस पर बच्चे शोर मचाते हुए अनुज के घर पहुंचे। वहां से परिवार के लोग आए और फिर टैंक में उतरकर देखा तो अनुज का शव मिल गया। इसके बाद परिवार में कोहराम मच गया। अनुज की मां पूनम बेहोश हो गईं।
बेखबर थी चौकी पुलिस
करगैना चौकी पुलिस के पास हुई घटना के बारे में तीन घंटे बाद तक पुलिस को कोई जानकारी नहीं थी। या फिर यूं कहा जाए कि जानकारी के बाद भी पुलिस ने इस मामले में मौके पर जाने की जहमत नहीं उठाई। जब कई पत्रकारों ने चौकी प्रभारी विक्रम सिंह को इस बारे में बताया तो भी वह इसे टालते रहे। बाद में इंस्पेक्टर हरिश्चंद्र जोशी को जानकारी हुई तो उन्होंने पुलिस भेजकर परिवार से बात कराई।
पिता बोले- किसी और के साथ न हो ऐसा
टेंपो चलाकर परिवार पालने वाले राजवीर का आठ माह का एक और बेटा भी है। वह अनुज की मौत से सदमे में थे। उन्होंने कहा कि वह बेटे के शव का सुबह अंतिम संस्कार करेंगे। पोस्टमार्टम नहीं कराएंगे और न ही कोई कानूनी कार्रवाई चाहते हैं। हालांकि यह जरूर कहेंगे कि इस तरह के टैंक किसी प्लॉट या सड़क पर न खुले न छोड़े जाएं, जिससे किसी का परिवार तबाह हो।
ऊपर तक भरा था पानी
कंक्रीट से बने छह फुट गहरे सेप्टिक टैंक में करीब साढ़े पांच फुट तक पानी भरा था। लोगों का कहना था कि मासूम अनुज ने बाहर निकलने को काफी मशक्कत भी की होगी लेकिन गहराई ज्यादा होने से वह बाहर नहीं निकल सका। टैंक जमीन के लेबल में था जिसकी वजह से अंधेरा होने पर वह दिखाई भी नहीं दिया होगा। इस घटना से अनुज के साथी बच्चे काफी सहमे हुए हैं।
पहले भी हुईं इस तरह की घटनाएं
- अक्तूबर 2015: सुभाषनगर में वेंडर श्यामलाल के डेढ़ साल के बेटे अमन की नाले में गिरकर मौत।
- जुलाई 2018: आंवला के मोहल्ला भुर्जी टोला के राजकुमार के तीन वर्षीय बेटे रचित की खुले नाले में डूबकर मौत।
- अगस्त 2018: डेलापीर चौराहे पर किराए के मकान में रहने वाले पूरनपुर निवासी जशोदा के तीन साल के बेटे शिवम की नगर निगम के मेन होल में गिरकर मौत।
- अगस्त 2018: भमोरा के वाहनपुर में सड़क निर्माण को खोदे गड्ढे में गिरकर लालाराम की मौत।
- अगस्त 2018: भुता के गांव सिंघाई में सड़क किनारे खुदे गड्ढे में डूबकर 10 वर्षीय नदी की मौत।
- फरवरी 2019: एजाजनगर गौंटिया में दो वर्षीय फैज की नाली में गिरकर मौत।
सड़क किनारे खुले नाले हादसों को दे रहे दावत
शहर में जगह-जगह खुले नाले हादसों को दावत दे रहे हैं। नगर निगम के सामने अयूब खां चौराहे के पास बड़ा नाला लंबे समय से खुला पड़ा है, जिसमें किसी के गिरने पर बाहर निकलना मुश्किल है। इसी तरह सिटी स्टेशन के सामने भी नाला खुला पड़ा है और सड़क के बिल्कुल बराबर में है। श्यामगंज से सेटेलाइट की ओर जाने वाले नाले का भी यही हाल है लेकिन कई हादसे होने के बावजूद नगर निगम नालों को पत्थरों से बंद कराने को लेकर कोई काम नहीं कर रहा है। इसके अलावा शहर में सीवर लाइन के लिए भी जगह-जगह गड्ढे खोदकर डाल दिए गए हैं।