बाबू के जरिये घूस लेने के आरोपों की पुष्टि, फिलहाल नोएडा डिपो में तैनात हैं सत्येंद्र वर्मा
बरेली। कंडक्टर से रिश्वत लेने के आरोप में रुहेलखंड डिपो के तत्कालीन एआरएम सत्येंद्र कुमार वर्मा को भी दोषी मानते हुए एंटी करप्शन टीम ने उनके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। उन्हें बाबू के जरिये घूस लेने का आरोपी बनाया गया है। वर्मा फिलहाल नोएडा डिपो में तैनात हैं।
रुहेलखंड डिपो के बाबू राजीव सक्सेना को एंटी करप्शन टीम ने 20 सितंबर 2019 को 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा था। राजीव ने बताया था कि एआरएम सत्येंद्र वर्मा के कहने पर वह परिचालक कुणाल से रिश्वत ले रहा था। दोनों पर रिपोर्ट दर्ज कर राजीव को उसी दिन जेल भेज दिया गया था पर एआरएम गायब हो गए थे। मामले की विवेचना इंस्पेक्टर चरन सिंह ने की। बाबू के खिलाफ 14 नवंबर को ही कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी गई थी। अब एआरएम के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल कर दी गई है।
अफसरों की मेहरबानी से बचते रहे एआरएम
एआरएम सत्येंद्र वर्मा का उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पहले गोरखपुर के निचनौल डिपो में तबादला किया गया, लेकिन गिरफ्तारी के डर से उन्होंने दो महीने ज्वाइनिंग नहीं की। इसके बाद उनका ट्रांसफर नोएडा डिपो करा दिया। वहां वह एआरएम कार्मिक के पद पर तैनात हैं। एआरएम का एक घर नोएडा में भी बताया जाता है, जहां उनका परिवार लंबे समय से रह रहा है। इस तरह कार्रवाई के बावजूद एआरएम मौज में हैं। वहीं, राजीव को पिछले दिनों जमानत मिलने के बाद आरएम ने नौकरी पर बहाल कर दिया है। कोर्ट का आदेश आने तक का तर्क देकर बहाली की गई है। बताते हैं कि राजीव की बहाली के लिए आरएम से कई अफसरों ने पैरवी की थी।
बरेली में अर्जी खारिज, हाईकोर्ट से मिली एआरएम को राहत
एआरएम पर कार्रवाई के लिए एंटीकरप्शन टीम को खासी मेहनत करनी पड़ी। बरेली यूनिट प्रभारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि एआरएम ने गिरफ्तारी से बचने के लिए बरेली में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट संख्या-एक में जमानत की अर्जी दी थी जो खारिज हो गई। इसके बाद हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर खुद को निर्दोष बताया। वहां से 13 नवंबर को अग्रिम जमानत मिल गई। हाईकोर्ट के आदेश पर एआरएम ने मुचलका, जमानत और पासपोर्ट बरेली पुलिस को सौंप दिया। इसके बाद एंटी करप्शन की टीम लखनऊ गई और निगम के एमडी डॉ. राजशेखर से एआरएम के खिलाफ अभियोजन चलाने की स्वीकृति मांगी। सिंह ने बताया कि पीड़ित, आरोपी बाबू और कर्मचारियों के बयान के अलावा भी कई ऐसे साक्ष्य हैं जो एआरएम को दोषी साबित करने के लिए पर्याप्त हैं। टीम एआरएम को सख्त सजा दिलाने की कोशिश करेगी। एआरएम के खिलाफ एक विभागीय जांच भी चल रही है।