बरेली। खुशहाली सभागार में शनिवार को पर्दे नाट्य ग्रुप ने हबीब तनवीर के लिखित और आदित्य रंजन के निर्देशित नाटक ‘चरणदास चोर’ का मंचन किया गया। हास्य, व्यंग्य, लोकसंगीत और प्रभावशाली कहानी कहने की शैली के माध्यम से ‘चरणदास चोर’ समाज की नैतिकता, न्याय और सत्ता की धारणाओं पर सवाल उठाता है।
चरणदास के साथ नाटक की शुरुआत होती है। चरणदास की मुलाकात समाज के कई शक्तिशाली लोगों से होती है। एक भ्रष्ट सेठ, लालची अधिकारी और एक ऐसी रानी से, जो चरणदास से प्रभावित होकर उसके प्रति आकर्षित हो जाती है। लालच, भय और धमकियों का सामना करने के बावजूद चरणदास अपने वचन से पीछे हटने से इन्कार कर देता है। उसकी ईमानदारी समाज के उन सम्मानित चेहरों के पीछे छिपे पाखंड, लालच और भ्रष्टाचार को उजागर कर देती है। रानी चरणदास को राजगद्दी और विवाह का प्रस्ताव देती है, लेकिन चरणदास ठुकरा देता है। क्योंकि, वह पहले ही वचन दे चुका है कि कभी राजा नहीं बनेगा और न ही किसी रानी से विवाह करेगा। यही अडिगता उसकी मौत का कारण बन जाती है।
नाटक में निधि सक्सेना,आदित्य, रोबिन खन्ना, गौरव गुप्ता आदि ने मुख्य भूमिका अदा की। थिएटर अड्डा में रंगालय एकेडमी की ओर से आयोजित थिएटर फेस्ट के 14वें दिन शनिवार को कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. विनोद पागरानी और अमित आहूजा ने किया। संयोजक शैलेंद्र आजाद के अनुसार, रविवार को शाहजहांपुर की टीम नाटक ‘शुद्धि’ का मंचन करेगी।