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अव्यवस्था : एक्सरे शुरू, मोबाइल से मरीज खींच रहे रिपोर्ट की फोटो

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बरेली। तीन सौ बेड अस्पताल में दो साल बाद आधी-अधूरी तैयारियों के साथ डिजिटल एक्सरे की शुरुआत हो गई है। हालांकि, प्रिंटर न होने से रिपोर्ट के लिए मरीजों को मशीन के डिस्पले का फोटो खींचना पड़ रहा है। मोबाइल फोन पर फोटो देखकर परामर्श देना चिकित्सकों के लिए मुश्किल है।
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तीन सौ बेड अस्पताल में कोरोना महामारी के दौरान ही एक्सरे मशीन स्थापित हुई थी। कोरोना थमा तो तत्कालीन मंडलायुक्त ने खाली पड़े अस्पताल में ओपीडी संचालित कराई। करीब छह माह तक बगैर प्रिंटर के ही आर्थो, चेस्ट और हड्डी रोग संबंधी मरीजों का एक्सरे हुआ, फिर तकनीकी खामी से मशीन ठप पड़ गई। इसे दुरुस्त कराने के लिए गारंटी कार्ड खोजा गया, पर वह मिला नहीं। सीएमएस का पदभार मिलने पर डॉ. इंतजार हुसैन ने फर्म को पत्र भेजा।
खरीदारी के प्रपत्र न मिलने पर सीएमओ से मशीन दुरुस्त कराने के लिए अनुरोध किया। बीते दिनों मशीन ठीक हुई और सर्विस के बाद इसका संचालन शुरू हो गया। प्रतिदिन 10-12 मरीजों का एक्सरे हो रहा है, लेकिन उन्हें रिपोर्ट यानी फिल्म नहीं मिल रही है।
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हार्डकॉपी के लिए निजी केंद्र पर दोबारा जांच करा रहे मरीज
दादा की जांच के लिए साथ आए आकाश ने बताया कि मोबाइल फोन से खींचे गए फोटो को देखकर सरकारी अस्पताल के डॉक्टर तो परामर्श दे देते हैं, पर दूसरे डॉक्टर देखने से इन्कार कर देते हैं। लिहाजा, निजी रेडियोलॉजी सेंटर से दोबारा एक्सरे कराना पड़ता है। सरकारी अस्पताल में एक्सरे निशुल्क है। निजी केंद्र पर पांच सौ रुपये देने पड़ते हैं।

एक्सरे मशीन से जांच शुरू हुई है। प्रिंटर न होने से दिक्कत है। शासन स्तर पर जल्द ही प्रिंटर की खरीद होनी है। इससे यहां की समस्या का भी समाधान हो जाएगा। - डॉ. इंतजार हुसैन, प्रभारी सीएमएस
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