गुरुग्राम के रायन इंटरनेशनल स्कूल की घटना के बाद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने सभी कान्वेंट स्कूलों के स्टाफ का सत्यापन और साइकोमेट्रिक टेस्ट कराने का फरमान जारी किया था, लेकिन बरेली में इसका पालन नहीं हो सका। स्कूल संचालकों का कहना है कि सीबीएसई ने यह बताया ही नहीं कि टेस्ट किस तरह होगा। अब सीबीएसई ने सभी स्कूलों को दो माह में सत्यापन और टेस्ट कराने के निर्देश दिए हैं, लेकिन टेस्ट कैसे हो, इसे लेकर अब भी स्कूल प्रबंधन पसोपेश में हैं।
सीबीएसई ने 12 सितंबर को स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्टाफ का सत्यापन और उनका साइकोमेट्रिक टेस्ट कराने को कहा था। सितंबर में ही यह कार्य पूरा होना था, लेकिन अधिकतर स्कूलों ने आदेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया। बरेली के अधिकतर स्कूल प्रबंधन का कहना है कि सीबीएसई ने आदेश के साथ यह स्पष्ट नहीं किया कि साइकोमेट्रिक टेस्ट लिखित में होगा या मौखिक। टेस्ट के लिए क्या मानक होंगे। इसलिए जिले के अधिकतर स्कूलों ने अपने यहां के स्टाफ का न तो सत्यापन कराया और न ही साइकोमेट्रिक टेस्ट। फीडबैक सीबीएसई को भेज दिया। अब सीबीएसई ने स्कूलों को 31 अक्तूबर तक का वक्त दिया है कि सत्यापन और साइकोमेट्रिक टेस्ट हर हाल में करा लें। हालांकि नियमों को लेकर स्कूलों में अब भी भ्रम की स्थिति है। इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष पारुष अरोड़ा ने बताया कि निर्देश स्पष्ट नहीं थे इसलिए सत्यापन और टेस्ट की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। जैसे निर्देश आएंगे उसी अनुसार साइकोमेट्रिक टेस्ट करा लिया जाएगा। फिलहाल अब 31 अक्तूबर तक का वक्त मिला है।