उद्यमी बने कुक्कुट व्यवसायियों को किया सम्मानित
संस्थान के कार्यवाहक निदेशक डॉ. जगबीर सिंह त्यागी ने बताया कि संस्थान से प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग लेकर सफल उद्यमी बने कुक्कुट व्यवसायी सम्मानित हुए। मेरठ के अब्बास रिजवी ने बटेर पालन और हेचरी व्यवसाय से पहचान बनाई। इनके फार्म में 10 हजार वयस्क बटेर रखने की क्षमता है। प्रतिमाह 30 हजार से अधिक एक दिन के चूजों की बिक्री होती है। संभल के सैयद फैज अहमद टर्की, गिनी फाउल पालन कर रहे हैं। फार्म में एक हजार टर्की, 15 सौ गिनी फाउल हैं। कुशीनगर के वशिष्ठ राव ने जापानी बटेर पालन, हैचरी व्यवसाय शुरू किया।
चूजों से खड़ा किया 1500 पक्षियों की क्षमता वाला फार्म
उत्तराखंड के नानकमत्ता की कमला राना को वर्ष 2023 में संस्थान से 120 देसी मुर्गी के चूजे मिले थे। इनका पालन कर उन्होंने करीब 1500 पक्षियों की क्षमता वाला पक्का फार्म तैयार किया। वर्तमान में उनके यहां करीब 900 देसी मुर्गियां हैं।
वहीं, विमला देवी ने वर्ष 2024 में मिले 32 चूजों से शुरुआत कर 700 पक्षियों की क्षमता वाला फार्म विकसित किया है। वर्तमान में उनके यहां करीब 450 पक्षी हैं। संस्थान की विकसित सीएआरआई सीमन डाइल्यूएंट तकनीक का राठी हैचरीज को 10 लाख रुपये में हस्तांतरण किया गया। यहां बटेर और मुर्गी के अंडे भी बिके।
एससीएसपी, टीएसपी से अपनाई स्वरोजगार की राह
अनुसूचित जाति उपयोजना और जनजातीय उपयोजना से स्वरोजगार अपनाने वाले लाभार्थियों को प्रशस्ति पत्र मिले। गांवों में कुक्कुट पालन, बकरी पालन, सुअर पालन, सिलाई, सौर ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ने पर सराहा। यहां संस्थान की वेबसाइट का लोकार्पण हुआ।
पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्रोजेक्ट ''ऑयस्टर मशरूम कल्टीवेशन'' विषयक फोल्डर का विमोचन हुआ। निदेशक ने 50वें स्थापना दिवस पर 50 नई गतिविधि, 50 सफल उद्यमी, 50 उत्कृष्ट प्रकाशन उपलब्धि के लिए प्रेरित किया। यहां डॉ. गीता, डॉ. मंजूर अहमद, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. संदीप सरन अन्य मौजूद रहे।