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सावधान! इस बार कुछ ज्यादा ही सताएंगे मच्छर

Mon, 20 Feb 2017 01:01 AM IST
बरेली।  
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सावधान! इस बार कुछ ज्यादा ही सताएंगे मच्छर - फोटो : careful! This time too they will persecute mosquito
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सर्दी से अभी पूरी तरह निजात मिली नहीं है, लेकिन मच्छराें ने आसपास डेरा जमाना शुरू कर दिया है। रात में सोते समय कान के पास मच्छर गुनगुन कर रहे हैं। बेहोश करने वाली दवाओं से रात भर सोने वाले मच्छर सुबह होते ही फिर सताना शुरू कर रहे हैं। दरअसल, तापमान बदलने से अचानक मच्छरों की संख्या बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि भीषण गर्मी आने तक इनकी मौजूदगी यूं ही बनी रहेगी। मच्छराें की इस बार अभी से हमले शुरू होने पर मलेरिया विभाग जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में इस मामले को रखेगी। नगर पंचायत और जल संस्थान को भी मच्छर से निजात दिलाने के कार्यक्रम में शामिल करने का प्लान है। जिला मलेरिया अधिकारी पीके जैन ने बताया कि मच्छर 25 डिग्री सेल्सियस से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर पैदा होते हैं। बरेली में फरवरी का तापमान एक फरवरी को 23 डिग्री सेल्सियस रहा। 10 फरवरी से 24 डिग्री के आगे बढ़ना शुरू हुआ। ऐसे तापमान में मच्छराें को पनपने का खूब मौका मिला। हालांकि बताया जा रहा है कि डेंगू का डर तो अभी नहीं है, लेकिन मलेरिया की आशंका है।
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- दवा नहीं कर रही है असर 
बरेली कालेज जंतु विज्ञान विभाग के डॉ. राजेंद्र गुप्ता ने बताया कि बदलते मौसम में मच्छराें की प्रतिरोधक क्षमता इतनी बढ़ जाती हैं कि ये किसी प्रकार के केमिकल से नहीं मरते हैं। परजीवी या बैक्टीरिया को मारने के लिए जितनी भी दवाएं दी जाती हैं, उनके द्वारा पैदा हुए परजीवी उतने ही अधिक शक्तिशाली और उन दवाआें को सहने के लिए एंटीबॉडी तैयार कर लेते हैं। कोई भी दवा लगातार पांच घंटे चलाने के बाद भी मच्छर कहीं कोने में छिपकर फिर काटना शुरू कर देते हैं। इससे भले ही मच्छर नहीं मर रहे हैं, लेकिन बीमारी बढ़ रही हैं। घराें के आसपास बगिया या पौधे लगाने वालाें को अधिक मच्छर लगते हैं। लेकिन ये मच्छर नहीं काटते। पौधों पर बैठने वाले मच्छर नर होते हैं ये सिर्फ पेड़ पौधाें के रसों को चूसते हैं, जबकि मादा मच्छर इंसानी खून चूसती है। जो पेड़ पौधाें पर नहीं बैठती।
मिलावट का खेल
 नगर निगम हर साल हजाराें रुपये से अधिक की कीटनाशक शहर के 70 वार्डोँ में मच्छराें से लड़ने को खर्च करता है। मार्च से जून और अक्तूबर से नवंबर तक यह छिड़काव होता है। जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. अजय मोहन अग्रवाल बताते हैं कि कीटनाशक में मैलाफ्योन नाम का केमिकल होता है जो हल्की सी मात्रा में ही कीड़ों व इंसानाें को मार सकता है। अगर मिलावट होगी तो मच्छर मरेंगे नहीं बल्कि बढ़ेंगे। शहर में दो मशीनाें से छिड़काव होता है। कई सभासद बताते हैं कि इन मच्छराें से इलाकाें में कोई असर नहीं होता।
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- कब और क्यों काटते हैं मच्छर 
मलेरिया विभाग के डीआर सिंह बताते हैं कि कार्बन डाईऑक्साइड (सीओ2 गैस) छोड़ने पर मच्छर अधिक काटते हैं। यही कारण है कि शाम को पेड़ों के आसपास मच्छरों का झुंड होता है। क्याेंकि  पेड़ सीओ2 गैस छोड़ते हैं। शरीर के तापमान और महक से भी मच्छर समीप आते हैं। गर्भवती महिलाआें और शराबियों को मच्छर अधिक काटते हैं। थकने पर भी मच्छर शरीर पर बैठते हैं।
- ये अपनाएं तरीके तो बचेंगे
घर के आसपास पानी न जमा होने दें
गंदगी बिल्कुल भी न रखें 
नालियाें को ढक दें
नीम की पत्तियाें को जलाएं 
मच्छरदानी लगाकर सोएं
नालियाें में केरोसिन डालें 
परफ्यूम कम लगाएं
पूरी बांह के कपड़े पहने
कम रोशनी करें
एंटी लार्वा का छिड़काव करें
- मलेरिया व डेंगू के लक्षण 
सर्दी लगना, बुखार आना, उल्टियां, थकावट, कमजोरी, सिरदद्र, बदनदर्द, हाथ पैर में एेंठन  
कैसे- कैसे मच्छर 
क्यूलेक्स मच्छर- फाइलेरिया, जापानी इंसेफेलाइटिस, गंदे पानी में पैदा
एनाफिलीज मच्छर- मलेरिया, साफ और बहते पानी में पैदा 
एडीज मच्छर- डेंगू, चिकनगुनिया, जीका, साफ और ठहरे हुए पानी में पैदा  
क्या कहते हैं विशेषज्ञ 
एंटीमोलॉजिस्ट (कीट विज्ञान विशेषज्ञ) डॉ. दीपक कुमार कहते हैं कि कोई भी मच्छर काटता है तो उसका असर तभी दिखेगा जब उसने किसी प्रभावित व्यक्ति को काटा होगा। अगर मच्छर ने फाइलेरिया, मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, जीका के मरीज को काटा होगा और तब दूसरे व्यक्ति को काटता है तो व्यक्ति बीमार होगा। मच्छर काटते हैं तो अपनी लार व्यक्ति के अंदर छोड़ते हैं यही बीमारी देता है। 
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