राहगीरों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने गंभीर रूप से घायल बलविंदर सिंह को एंबुलेस से अस्पताल भेजा। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई। जानकारी पर मृतक की पत्नी कमलजीत कौर, बेटी निमरत और मां अमर कौर भी अस्पताल पहुंच गईं। बलविंदर की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
बुझ गया घर का इकलौता चिराग
मृतक बलविंदर सिंह छह बहनों के अकेले भाई थे। घर की जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर थी। खेती-बाड़ी के साथ वह पिज्जा हट में काम करके परिवार का भरण-पोषण करते थे।
हाईवे पर जगह-जगह छुट्टा पशुओं का डेरा
नवाबगंज से लेकर पीलीभीत तक हाईवे पर जगह-जगह छुट्टा पशु बैठे रहते हैं। इस वजह से आए दिन हादसे होते रहते हैं। सड़क भी जगह-जगह क्षतिग्रस्त है। चार दिन पहले ही हाईवे पर ईध जागीर गांव के रहने वाले एक ही परिवार के तीन सदस्यों और बसंतापुर गांव निवासी एक युवक की हादसे में मौत हो गई थी। गरगईया गांव में बनी पुलिया पर बीते एक साल में दर्जन भर से ज्यादा लोग चोटिल हो चुके हैं।