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बागी के सिर ताज,बच गई लाज

Sat, 28 Feb 2015 01:13 AM IST
बरेली
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 विधायक राजेश अग्रवाल का फार्मूला काम आया और कैंट बोर्ड में तीन सदस्यों वाली भाजपा ने अपनी रूठी सदस्य की घर वापसी कर लाज बचा ली।  उपाध्यक्ष पद पाने के लिए उसे अपने अधिकृत प्रत्याशियों को शांत कर बागी प्रत्याशी मीता सती के सिर पर ताज सजाना पड़ा।
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कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष पद पर चुनाव के लिए तीन प्रत्याशियों ने नामांकन कराया था। इसमें मीता सती, धर्मवीर यादव सेठी और राज कुमार थे। तीनों ही दावेदार निर्दलीय थे। भाजपा की ओर से एक भी नामांकन नहीं हुआ।  मीता सती भाजपा से जुड़ी रही हैं। उन्होंने चुनाव से पहले भाजपा से ही सदस्य प्रत्याशी के लिए टिकट मांगा था। भाजपा ने तब उनकी जगह रंजना चोपड़ा को टिकट दिया। इस पर मीता सती बगावत पर उतर्र आइं और भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन करा कर चुनाव जीत गई।
बोर्ड के सभागार में सुबह 11 बजे चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई। इसमें बैलेट पेपर से मतदान हुआ। उसके तुरंत बाद ही अध्यक्ष ब्रिगेडियर अनिल शर्मा ने बैलेट पेपर खुलवाया। इसमें मीता सती को चार वोट और धर्मवीर यादव को तीन वोट मिले। जबकि राज कुमार शर्मा को एक भी वोट नहीं मिला। उन्होंने अपना वोट भी सेठी की झोली में डाल दिया।
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इसके बाद अध्यक्ष ने अपनी शुभकामनाएं देते हुए मीता सती को उपाध्यक्ष के लिए विजयी घोषित किया। साथ ही प्रमाण पत्र भी सौंपा। उन्होंने उम्मीद जताई कि वह उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी को बखूबी निभाएंगी और कैंट के विकास को ध्यान में रख कर काम करेंगी। इससे पहले सीईओ विनीता वी देश पांडेय ने प्रत्याशियों का परिचय कराया।

तो क्या बारी-बारी...
कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष पद के चुनाव के बाद एक फार्मूले पर चर्चा होती रही। बताया जा रहा है कि बीती रात ही मीता सती का उपाध्यक्ष बनना तय हो गया था। इसके लिए फार्मूला ये निकाला गया कि अभी मीता सती को पद मिलेगा लेकिन एक अंतराल के बाद दूसरों को भी कुर्सी मिलेगी। इसी सहमति के बाद भाजपा की ओर से किसी ने नामांकन नहीं किया।
उपाध्यक्ष पद के चुनाव से एक दिन पहले तक सात सदस्यों में पांच सदस्य दावेदारी में थे। भाजपा के दो प्रत्याशी दावेदारी में लगे हुए थे। इसका फायदा निर्दलीय खेमा उठा रहा था। खरीद फरोक्त की बात भी आगे चल पड़ी थी। एक बार तो ऐसा लगने लगा कि  एक भाजपा सदस्य निर्दलीय को साथ लेकर अपनी जीत पक्की कर लेगा।  सूत्रों का कहना है कि मीता सती पहले ही उपाध्यक्ष पद पर दावा कर चुकी थीं। लिहाजा यह तय किया गया पहला मौका उन्हें ही दिया जाए। फिर सवा-सवा साल के लिए हर सदस्य को मौका दिया जा सकता है। हालांकि इस सवा साल वाले फार्मूले पर पार्टी नेता अधिकृत तौर पर कुछ नहीं कह रहे हैं।

महिला होने की वजह से प्रमुखता दी: राजेश
बरेली।  विधायक राजेश अग्रवाल ने  कहा कि पार्टी सदस्यों में कोई मतभेद नहीं था। सभी की सहमति से यह फैसला हुआ है। जहां तक मीता सती की बात है वह पहले से ही भाजपा में रहीं हैं। उन्होंने पदों की जिम्मेदारी भी संभाली है। अब भी सदस्य का चुनाव जीतने के बाद वह भाजपा में हैं और उनको पद भी दिया गया है। उपाध्यक्ष बनाने के लिए सिर्फ यही सोच थी कि पार्टी की पुरानी सदस्य और महिला हैं।  महानगर अध्यक्ष पुष्पेंदु शर्मा ने कहा कि पार्टी सदस्यों में कोई मतभेद नहीं है। यह अपने लोगों को पार्टी में जोड़ने की दिशा में एक मजबूत प्रयास था।
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