बरेली। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी का भी इलाज खोज लिया है। जरूरत है तो सिर्फ समय पर जांच और रोग की पहचान होने पर बिना देरी किए इलाज शुरू कराने की। देरी से प्रभावित स्थान पर बेतहाशा दर्द, आर्थिक बोझ, जान के जोखिम का संकट होता है।
वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ डॉ. आरके चितलांगिया के मुताबिक, कैंसर सिर्फ शरीर को प्रभावित नहीं करता, बल्कि मरीज, उसके परिवार पर मानसिक और सामाजिक दबाव भी डालता है। ऐसे में परिवार का सहयोग, सकारात्मक व्यवहार और इलाज के दौरान मरीज का मनोबल बनाए रखना भी अहम होता है।
उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष 22 सितंबर को कैंसर पीड़ितों के कल्याण और जागरूकता के लिए विश्व रोज दिवस मनाया जाता है। कहा कि कई प्रकार के कैंसर का सुरक्षित इलाज अब जिले में ही मुमकिन है। पीईटी स्कैन से कैंसर का पता करने की तकनीक भी बरेली में है। महानगरों में इलाज कराने वाले तमाम मरीजों की रेडियो और कीमोथेरेपी भी यहीं हो रही है। नतीजे भी बेहतर मिल रहे हैं।
कहा कि ओपीडी में पहुंच रहे मरीजों में सबसे ज्यादा लोग ओरल कैंसर से पीड़ित होते हैं। दूसरे स्थान पर ब्रेस्ट कैंसर और तीसरे पर सर्वाइकल की समस्या अधिक है। वैश्विक स्तर पर चार में से एक मौत की वजह कैंसर होता है। इसलिए संदिग्ध लक्षण दिखें तो डॉक्टर को दिखाएं।
इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
मुंह में ऐसा छाला जो लंबे समय तक ठीक न हो, मुंह में सफेद या लाल दाग, शरीर में कहीं लगातार बनी रहने वाली गांठ, वजन का अचानक कम होना, असामान्य रक्तस्राव, लगातार खांसी या आवाज में बदलाव, मल-मूत्र की आदत में लंबे समय तक बदलाव, भोजन को निगलने में परेशानी हो तो खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सक से जांच कराएं। तंबाकू का किसी भी रूप में सेवन करने से कैंसर की आशंका बढ़ती है।