बरेली। मुख्यमंत्री बनते ही योगी आदित्यनाथ ने एलान किया था कि नहर और तालाब पाटकर जमीनों पर कब्जे करने वाले लोग किसी हालत में नहीं बचेंगे लेकिन सिस्टम ही सूबे के मुखिया की मंशा पूरी होने के आड़े आ गया। शासन बार-बार भूमाफिया की फर्जी लिस्ट पर नाराजगी जताता रहा लेकिन फिर भी शहर के बीचोबीच गुजरने वाली बरेली रजवाह पर कब्जा करके कालोनियां, मॉल और अस्पताल बनाने वाले इस लिस्ट में शामिल नहीं हुए। इनमें से चार को तो अदालतों से हुए फैसलों में भी दोषी करार दिया जा चुका है।
प्रशासन की टॉप 10 भूमाफिया की रिपोर्ट में एक भी शहर का नहीं है। ग्रामीण इलाके के ही मामूली विवादों में उलझे लोगों को ही इसमें शामिल किया गया है जबकि शहर में नहरों, नदी और नगर निगम की जमीन पर कब्जा करने वाले तमाम नाम प्रशासन की आंखों के सामने मौजूद हैं। नदी और नहर की जमीनों पर कब्जा कर इन लोगों कई कॉलोनियां खड़ी कर दीं और मकान बेच दिए। दमखोदा से शुरू होकर बीसलपुर तक जाने वाली ‘बरेली रजवाह’ की करीब 33731 वर्ग मीटर जमीन पर सालों पहले भूमाफिया ने कब्जा कर कॉलोनियां बना दीं। अवैध निर्माण करते हुए तमाम घर, कॉम्पलेक्स आदि बनाए और फिर उसका सौदा भी कर दिया। 2001 से 2005 के बीच नहर की जमीन कब्जाने वाले 17 लोगों के खिलाफ एसीएम प्रथम और सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट में मुकदमा दायर हुआ लेकिन अरबों की जमीन कब्जाने वाले इन कब्जेदारों को प्रशासन ने अब तक क्लीनचिट दे रखी है।
शहर में 17 लोगों ने कब्जाई नहर
नहर विभाग की रिपोर्ट में स्पष्ट जिक्र है कि शहरी क्षेत्र में 3.329 हेक्टेयर यानी 33731 वर्ग मीटर नहर की जमीन पर कब्जा किया गया है। कब्जा करने वाले 17 लोग हैं। तत्कालीन डीएम ने मुकदमा तो दायर करवा दिया लेकिन सालों से मुकदमों में फैसला नहीं हो सका है। चार कब्जेदारों के खिलाफ पांच साल बाद फैसला हुआ था लेकिन इसके बाद भी कार्रवाई के नाम पर दिखावा किया जा रहा है। इसमें धौरेरा माफी, बिहारमान नगला से गुजर रही नहर की जमीन कब्जा करने पर हरुनगला में शमशेर बहादुर सिंह, पीरबहोड़ा में दुकान निर्माण में सलीम, परतापुर जीवन सहाय में बनी कॉलोनी, पीरबहोड़ा में नूर अली और डॉ. अजय सक्सेना, स्वालेनगर में अरुण कुमार गुप्ता, नवादा जोगियान में प्रवीण शर्मा, शिव मंगल सेन, मुख्तयार समेत दो और बड़े कॉलोनाइजरों पर नहर विभाग ने मुकदमे दायर किए थे। नवादा जोगियान की जमीन कब्जाकर लॉन बनाने समेत चार मामलों में नहर विभाग के पक्ष में फैसला आया है।
संबंधित विभागों से भूमाफिया की सूची में नहर, नदी, ग्रीन बेल्ट आदि जमीन कब्जाने वालों को दर्ज करने के लिए रिपोर्ट मांगी गई है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। - नितीश कुमार, डीएम