अति ज्वलनशील पैरामेथेन हाइड्रोपरॉक्साइड में लगी आग बुझाते वक्त एक दमकल कर्मी बेहोश
सीबीगंज। कपूर फैक्टरी ओरियंटल एरोमेटिक्स लिमिटेड में लगी आग से फैक्टरी में रखे पीएमपीएच (पैरामेथेन हाइड्रोपरॉक्साइड) के ड्रमों ने आग पकड़ ली तो उनके फटने से तेज धमाके होने लगे। इससे पूरा इलाका दहल उठा। धमाके इतने तेज थे कि फैक्टरी परिसर में बने कई आवासों की खिड़कियों के शीशे टूट गए। हर तरफ अफरातफरी मच गई। बृहस्पतिवार शाम करीब साढ़े छह बजे जब फैक्टरी में धमाके हुए तो ज्यादातर घरों में शाम के खाने की तैयारी चल रही थी। इसी बीच धमाके होने लगे। खिड़कियों के शीशे टूटकर गिरने लगे। कुछ दरवाजों के तो कुंडे उखड़कर जमीन पर गिर पड़े। फैक्टरी परिसर में ही रहने वाली 14 वर्षीय आस्था पाठक घटना के समय सो रही थीं, धमाके हुए तो वह बेड से जमीन पर गिर पड़ीं। सभी घरों में अफरातफरी का माहौल हो गया। लोग घरों से निकलकर बाहर भागने लगे।
खाली कराई गई फैक्टरी और आवास
विकराल आग को देखते हुए फैक्टरी प्रशासन ने परिसर में बने सभी आवासों को खाली कराकर लोगों को वहां से करीब आधा किलोमीटर दूर भेज दिया। फैक्टरी से भी कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया गया। गेट पर सुरक्षा कर्मी तैनात कर लोगों की आवाजाही पर रोक दी गई। एक घंटे बाद जब आग बुझ गई तभी लोगों को अंदर जाने की अनुमति मिली।
आग बुझाने के बाद काम शुरू
घटना फैक्टरी के कैथलिक प्लांट में हुई। आग बुझने के करीब एक घंटे बाद कर्मचारियों को फिर से अंदर बुला लिया गया और काम शुरू हो गया। इसकी लोगों के बीच चर्चा भी रही।
तमाम इलाकों में फैली दहशत
लगातार कई धमाकों की तेज आवाज सीबीगंज से लेकर आसपास के गांवों बिधौलिया, परसाखेड़ा, खड़ौआ, मथुरापुर आदि तक पहुंची तो लोगों ने फैक्टरी की ओर दौड़ लगा दी। मगर पुलिस ने उन्हें दूर ही रोक दिया और किसी को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी।
हाईवे पर भीड़, वाहन भी रोके गए
कपूर फैक्टरी ओरियंटल एरोमेटिक्स लिमिटेड सीबीगंज में लखनऊ-दिल्ली नेशनल हाईवे पर स्थित है इसलिए तमाम लोगों की भीड़ वहां जमा हो गई। दमकल वाहनों को रास्ता देने के लिए पुलिस ने हाईवे पर अन्य वाहनों का आवागमन रोक दिया। इसके चलते कुछ देर के लिए हाईवे पर दोनों ओर वाहनों की लाइन लग गई तो वहां जाम की स्थिति बन गई।
खतरनाक केमिकल की तेज गंध से घुटने लगा दम
सांस लेना भी हो गया मुश्किल, एक दमकल कर्मी हुआ बेहोश
लोगों ने लगाए मास्क और मुंह पर बांधे रूमाल, देर रात तक फैली रही गंध
सीबीगंज। केमिकल पीएमपीएच (पैरामेथेन हाइड्रोपरॉक्साइड) में आग लगने के बाद उसकी गंध वहां फैली तो आसपास के लोगों को सांस लेना दूभर हो गया। इससे आग बुझाने में जुटे दमकल कर्मी मोहम्मद आसिम बेहोश हो गए। उन्हें अन्य साथी वहां से उठाकर ले गए।
पैरामेथेन हाइड्रोपरॉक्साइड केमिकल कपूर को ज्वलनशील बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है। बरेली कॉलेज के प्राचार्य एवं केमिस्ट्री के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनुराग मोहन के मुताबिक, पैरामेथेन हाइड्रोपरॉक्साइड अति ज्वलनशील केमिकल है। जब यह जलता है तो इसके संपर्क में आने से त्वचा बहुत जल्दी झुलस जाती है। आंखों को भी नुकसान हो सकता है। इसके तेज ज्वलनशील होने के कारण ही स्पार्किंग से आग भड़क गई और काबू करने तक एक के बाद कई धमाके हुए। मगर केमिकल की गंध ने लोगों को सबसे ज्यादा परेशान किया। देर रात तक पूरे इलाके में यह गंध फैली रही, जिसके चलते लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत हुई। तमाम लोग मुंह पर रूमाल बांधे नजर आए।
गनीमत रही कि उस वक्त था टी ब्रेक
फैक्टरी में सैकड़ों कर्मचारी काम करते हैं लेकिन जब घटना हुई तो उस दौरान टी ब्रेक था। इस वजह से अधिकांश कर्मचारी फैक्टरी से बाहर थे। इससे बड़ा हादसा होने से बच गया। अगर ऐसा नहीं होता तो आग ही नहीं केमिकल जलने के बाद उठी तेज सुगंध भी तमाम कर्मचारियों के लिए मुश्किल हो जाती है।
लोगों की बातचीत
जब धमाका हुआ तो हम अंदर कमरे में थे। बाहर निकले तो देखा कि खिड़की टूटकर एक ओर लटक गई है और शीशे भी टूटे पड़े हैं। - शगुन
पहला धमाका तो इतना तेज था, लगा कोई बम फटा है। समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या करें। फिर सायरन बजा और सभी बाहर निकल गए। - सरिता देवी
पूरे इलाके में बहुत तेज गंध आ रही थी। सांस लेना भी मुश्किल हो गया था। सभी लोगों मुंह पर रूमाल बांधे नजर आ रहे थे। - शोभित राघव
मैं कोचिंग गया था। धमाके की आवाज पर वहां से भागकर आया तो फैक्टरी में आग लगने की जानकारी हुई। सभी लोग इधर-उधर भाग रहे थे। - हिमांशु
वर्ष 1981 में हुए धमाके में एक मजदूर की हुई थी मौत
गनीमत रही कि नहीं फटा बायलर, वरना होता बड़ा हादसा
सीबीगंज। बृहस्पतिवार को हुए धमाके से यहां काम करने वाले पुराने कर्मचारियों के जहन में वर्ष 1981 में हुए धमाके की याद ताजा हो गई। एक पुराने कर्मचारी ने बताया कि उस दौरान भी ऐसा ही धमाका हुआ था लेकिन उन्हें यह याद नहीं है कि वह धमाका कैसे हुआ। सभी बस यही कह रहे थे कि गनीमत रही बॉयलर नहीं फटा, वरना बड़ा हादसा होता। कपूर फैक्टरी ओरियंटल एरोमेटिक्स लिमिटेड पूर्व में कैंफर एंड एलाइड प्रोडक्ट लिमिटेड के नाम से जानी जाती थी। कुछ साल पहले इसका नाम बदल गया। मगर जब बृहस्पतिवार को घटना हुई तो लोग कैंफर फैक्टरी का नाम लेकर वर्ष 1981 की घटना का जिक्र करने लगे। इस घटना में एक मजदूर की मौत हो गई थी और कुछ लोग घायल भी हुए थे।