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Bareilly News: सरकार को ना...ना... कर चोरी से भर रहा व्यापारियों का खजाना

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बरेली। राज्य कर की डिजिटल व्यवस्था से कारोबारी देय टैक्स छिपा नहीं सकते। लिहाजा, बोगस फर्मों से टैक्स का समायोजन दिखाकर कारोबारी सरकारी खजाने को चूना लगा रहे हैं। विशेषज्ञ के मुताबिक एक व्यापारी द्वारा खरीदे गए माल की बिक्री अगर किसी ग्राहक को की जाए तो टैक्स सरकारी खजाने में जाएगा, लेकिन वही माल अगर किसी व्यापारिक फर्म को बेचा जाए तो वहां टैक्स देय नहीं होगा।
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ऐसे में कारोबारी फर्जी फर्म बना लेते हैं। उसका बिल-वाॅउचर लगाकर टैक्स देने से बच जाते हैं। जब फर्म अस्तित्व में ही नहीं है तो उसकी करदेयता का सवाल ही नहीं उठता। एसआईबी की छापा कार्रवाई में ज्यादातर ऐसे ही मामले सामने आए। करोड़ों रुपये टर्नओवर के बावजूद व्यापारी टैक्स जमा नहीं कर रहे थे।
केस-1
24 अक्तूबर को एसआईबी ने पीलीभीत के पुत्तन आतिशबाज के कारोबार संबंधी रिकॉर्ड खंगाला तो पता चला कि 2.15 करोड़ रुपये के माल की खरीद पर महज 1.7 करोड़ रुपये की बिक्री दिखाई। कारोबारी सिर्फ 17 हजार रुपये राज्य कर जमा कर रहा था। शेष टैक्स का समायोजन आईटीसी के जरिये हो रहा था। मौके पर दस लाख रुपये टैक्स जमा कराया गया।
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केस-2
26 अक्तूबर को टीम ने बदायूं रोड स्थित राज स्वीट्स पर छापा मारा था। फर्म द्वारा ग्राहकाें को कच्चे बिल दिए जा रहे थे। मौके से 10 लाख रुपये का स्टाॅक सील किया गया। दस्तावेजों की जांच में 50 लाख रुपये कर चोरी पकड़ी गई। मौके से टीम ने फर्म संचालक से पांच लाख रुपये जमा कराए।

केस-3
10 नवंबर को सीबीगंज के नगरिया कला स्थित रब जरी आर्ट रेडीमेड गारमेंट्स पर अधिकारी खुद ग्राहक बनकर पहुंचे थे। सालाना पांच करोड़ रुपये की बिक्री के बावजूद देय कर का समायोजन फर्जी फर्मों के जरिये हो रहा था। करीब 50 लाख रुपये की बिक्री फर्जी फर्मों को दर्शायी गई। ग्राहकों को कच्चे बिल दिए जा रहे थे।

कच्चे बिल काटकर स्टॉक भी लगा रहे ठिकाने
टैक्स चोरी में पकड़े गए कारोबारियों के दस्तावेजों की जांच में पता चला कि वे आईटीसी के जरिये टैक्स समायोजित करने के साथ ही, कच्चे बिल पर माल खपा रहे थे। बीते माह दो प्रतिष्ठानों पर जीएसटी अफसर खुद ग्राहक बनकर पहुंचे थे। उन्होंने सामान खरीदा और बिल मांगा तो पर्ची थमा दी गई। इससे स्टॉक खपाने की पोल खुली। कई व्यापारी ग्राहक को कच्चा बिल थमाकर टैक्स देने से बच जाते हैं। बाद में कच्चे बिल पर बिके माल का पक्का बिल बनाकर ये कर का समायोजन करते हैं।

कर चोरी के संदिग्ध मामलों की सघन निगरानी की जा रही है। फर्जी फर्मों से इनपुट टैक्स क्रेडिट के जरिये कर समायोजन करने वालों समेत कच्चा बिल देने वालों की भी जांच हो रही है। कर चोरी पकड़े जाने पर कार्रवाई की जा रही है। अपील है कि व्यापारी नियमानुसार जीएसटी जमा कराएं। - एचपी राव दीक्षित, अपर आयुक्त ग्रेड-1 राज्य कर
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अमर उजाला ब्यूरो
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