अबकी बार चौघड़िया तिथि का नहीं है मान, सूर्योदय के बाद सुहागिनें कर सकती हैं पूजन
बरेली। पति की दीर्घायु और परिवार में सुख समृद्धि के लिए शुक्रवार को सुहागिनें वट सावित्री अखंड व्रत का अनुष्ठान करेंगी। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक 22 मई को ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या पड़ रही है। इस दिन पूरे मनोयोग से किया गया व्रत सौ गुना फलदायी माना गया है।
ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार के मुताबिक, वट सावित्री व्रत में वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है। वट वृक्ष पर सुहागिनें जल चढ़ाकर कुमकुम, अक्षत लगाती हैं और पेड़ की शाखा में चारों तरफ से रोली बांधती हैं। पूरे विधि विधान से पूजा करने के बाद सती सावित्री की कथा सुनती हैं। मान्यता है कि इस कथा को सुनने से सौभाग्यवती महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे ही अपने मृत पति सत्यवान को जीवित किया था। इसलिए इस व्रत का नाम वट सावित्री पड़ा। बताया कि वट एक ऐसा वृक्ष है जिसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास होता है। बताया कि अबकी बार वट सावित्री व्रत पूजा के लिए चौघड़िया तिथि की जरूरत नहीं पड़ेगी।
वट सावित्री अमावस्या मुहूर्त
अमावस्या तिथि की शुरुआत और समाप्त: 21 मई की रात 9.35 बजे से 22 मई की रात 11.08 बजे तक।
उदयातिथि का मान होने की वजह से वट सावित्री व्रत का अनुष्ठान 22 मई को किया जाना श्रेयस्कर है।