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नई सरकार से गारंटी चाहते हैं उद्यमी

Fri, 16 Feb 2018 05:52 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
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investment
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प्रदेश सरकार औद्योगिक माहौल बनाने के लिए यूपी में बड़े निवेशकों को लाने का ताना-बाना बुन चुकी है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ विदेश दौरे पर गए और निवेशकों को न्यौता दिया था। देश भर के अन्य प्रमुख उद्यमियों से यूपी में उद्योग लगाने को कहा है। इसके तहत ही 21 और 22 फरवरी को इंवेस्टर्स समिट होने जा रहा है। संभवत: इसमें प्रधानमंत्री भी मौजूद रहेंगे। बरेली समेत सभी जिलों से प्रस्ताव सहित निवेशक आमंत्रित किए गए हैं। बरेली में अब तक करीब 775 करोड़ रुपये के प्रस्ताव मिल चुके हैं। चैंबर ऑफ कॉमर्स और इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन पदाधिकारी इसे सफल बनाने के लिए सक्रिय हो गए हैं। उद्यमियों का कहना है कि सरकार नई औद्योगिक नीति तो ले आई लेकिन निवेशक को ऐसा संदेश नहीं मिला है कि कारखाना लगाने के बाद उसे कितनी सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। क्योंकि इन दिनों विभिन्न विभाग छापामारी कर रहे हैं। इंस्पेक्टर राज खत्म करने को कहा गया था लेकिन यह सब महज कागजी साबित हुआ है। इसके बावजूद बरेली से बड़े उद्यमी समिट में शामिल होने जा रहे हैं।
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नए उद्योगों के बने प्रस्ताव
जिले में खाद्य प्रसंस्करण, ग्लूकोज, मिल्क प्लांट, प्लाईवुड, सौर ऊर्जा, कागज उद्योग, स्टेशनरी, रिफाइनरी समेत कई नए उद्योग लगाने के लिए प्रस्ताव मिले हैं। 20 प्रमुख उद्यमियों ने अपने प्रस्ताव उद्योग विभाग को सौंप दिए हैं। इंवेस्टर्स समिट में इन पर चर्चा होगी और करार भी होने की संभावना है। इसके अलावा छोटे निवेशक भी ढाई सौ करोड़ से अधिक के प्रस्ताव बना रहे हैं। उम्मीद है कि समिट में बरेली से एक हजार करोड़ से अधिक के प्रस्ताव पहुंचेंगे।

बदहाल हैं औद्योगिक क्षेत्र
जिले में तीन सरकारी औद्योगिक क्षेत्र और छह मिनी औद्योगिक आस्थान हैं। उद्यमियों का कहना है कि परसाखेड़ा, सीबीगंज जैसे बड़े क्षेत्रों में अभी तक मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। सड़क, अतिक्रमण, जल निकासी, सफाई आदि तमाम समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। नगर निगम नियमित टैक्स लेता है, इसके बावजूद अब तक यहां बदहाली ही नजर आती है। 
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सरकार गारंटी दे - फोटो घनश्याम खंडेलवाल
नई सरकार अच्छी योजना लाई है। नई औद्योगिक नीति भी लाभप्रद है लेकिन क्या गारंटी है कि कारखाना लगने के बाद उसे आर्थिक सुरक्षा मिल पाएगी। समिट से बहुत सारी उम्मीदें हैं। सरकार को नए उद्योग लगवाने के साथ ही बंद पड़ी इकाइयों की भी चिंता करनी होगी। इनके लिए कोई प्रभावी पैकेज देना चाहिए। योजनाएं बनती हैं लेकिन लाभार्थी तक आते-आते उनका स्वरूप बदल जाता है और इंस्पेक्टरराज जैसी स्थिति हो जाती है। हम अच्छे प्रस्ताव लेकर जा रहे हैं। आपसी चर्चा के दौरान प्रस्तुत करेंगे।
- घनश्याम खंडेलवाल, अध्यक्ष चैंबर ऑफ कॉमर्स

सरकारी तंत्र सहयोग करे 
यूपी में नई सरकार को एक साल हुआ है। उद्योग और उद्यमियों के बारे में सोचा जा रहा है, अच्छी बात है। साल भर में ही बरेली समेत तमाम स्थानों पर नए उद्योग लगे हैं। अगर सरकारी तंत्र इसमें सहयोग करे तो औद्योगिक प्रक्रिया और तेजी पकड़ेगी। छापा और चेकिंग के नाम पर परेशान करने की नीति बंद होनी चाहिए। निवेशक को लगे कि उसे सुरक्षा कवच मिला है। ऐसे कदम उठाने से आर्थिक क्रांति आना तय है। नई औद्योगिक नीति में बहुत कुछ है। समिट में इसे स्पष्ट कराने की कोशिश करेंगे और अपने प्रस्ताव भी सौंपेंगे।
- दिनेश गोयल, मंडलीय अध्यक्ष, आईआईए


इंवेस्टर्स समिट को लेकर उद्यमियों में उत्साह है। उन्हें लगता है कि सरकार कुछ नया करेगी। इसीलिए नए उद्योग लगाने के प्रस्ताव मिल रहे हैं। उम्मीद है कि बरेली जिले में एक हजार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव पहुंचेंगे। अभी तक पौने आठ सौ करोड़ के प्रस्ताव मिल सके हैं। दो दिवसीय समिट में जिले से करीब 30 छोटे-बड़े निवेशक भाग ले रहे हैं।
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- अनुज कुमार, उपायुक्त उद्योग
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