बरेली। दूसरे राज्यों और परिक्षेत्र की रोडवेज बसें आ गईं तो ठीक, वरना इंतजार कर रहे यात्रियों की मुसीबत बढ़ जाती है। लोकल स्टाफ के पास न तो इनकी लोकेशन होती है, न ही अन्य जानकारी। सिर्फ पार्किंग शुल्क और अनुबंध पर ही इनका संचालन हो रहा है। इस वजह से राजस्थान और उत्तराखंड के यात्रियों को काफी परेशानी होती है।
शहर के दो बस अड्डों से रोज 30 हजार से अधिक यात्री बसों से सफर करते हैं। इसमें उत्तराखंड के हल्द्वानी, टनकपुर, हरिद्वार, देहरादून और राजस्थान के भरतपुर, जयपुर, अजमेर व खाटू श्याम की सवारियां ज्यादा होती हैं।
इन रूटों पर रुहेलखंड डिपो की नियमित बसों के साथ ही अन्य परिक्षेत्र और दूसरे राज्यों की बसों का संचालन होता है। इसमें राजस्थान रोडवेज की ब्लू लाइन, स्टार लाइन और साधारण बसें शामिल हैं। वहीं टनकपुर, हल्द्वानी डिपो और हरियाणा रोडवेज की बसों का संचालन भी इन रूटों पर होता है।
सेटेलाइट और पुराने बस अड्डे पर कर्मचारियों को इन बसों के बारे में कोई जानकारी नहीं होती। ये बसें आएंगी या नहीं, यह सूचनाएं भी उपलब्ध नहीं होती।
यूपी रोडवेज के ही अन्य परिक्षेत्र की बसों के बारे में लोकल स्टाफ को जानकारी नहीं होती। पूछताछ केंद्र पर भी इन बसों के बारे में यात्रियों को संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाता। वहां यात्रियों को दो-तीन घंटे बाद आने वाली स्थानीय बसों के बारे में बताया जाता है। संवाद