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सराफा हड़ताल में पिस रहे हैं गरीब कारीगर

Sat, 19 Mar 2016 12:48 AM IST
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
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प्रदश्‍ाऱ्र्शन
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सराफा व्यापारियों की सीधी लड़ाई सरकार से है लेकिन जॉब और रिपेयर कारीगर किससे लडे़। पिछले दो सप्ताह से चल रहे आंदोलन ने इन शिल्पियाें को तोड़ कर रख दिया है। हर रोज दिहाड़ी से घर चलाने वालों का चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है। बेमियादी हड़ताल से आजिज आए कारीगरों ने बाजार का कर्फ्यू तोड़ना शुरू कर दिया है। बंद बाजार में आकर काम करने लगे हैं। दिन भर में रिपेयर से सौ-पचास रुपये भी जुटाना मुश्किल हो रहा है। ‘अमर उजाला’ ने रिपेयर कारीगर और घरों में गहने गढ़ने वाले कारीगरों से बात कर उनका दर्द जाना।
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बमनपुरी, बिहारीपुर, मलूकपुर, साहूकारा आदि स्थानों पर डाई और हाथ से काम करने वाले कारीगरों के यहां का पूरा परिवार ही काम करता है। दिन भर में जॉब कारीगर पांच-सात सौ रुपये कमा पाता है। अब इन घरों से खटपट की आवाज नहीं आ रही है। बमनपुरी में परिवार सदस्यों के साथ गहने बनाने वाले जॉब कारीगर दिनेश रस्तोगी और कमलेश बताते हैं कि  आर्डर नहीं मिलने से खाली बैठे हैं।
उधर, शिवाजी मार्ग स्थित सराफा बाजार में रिपेयर कारीगर आना शुरू हो गए हैं। बाजार में सुरेश खाली बैठा था। बीड़ी का कस लगाते हुए रोने लगता है, जेब से निकाल कर दस-दस के दो नोट दिखाते हुए कहता है कि दिन भर में उसने सिर्फ बीस रुपये कमाए हैं। इससे कैसे चूल्हा जलेगा? बच्चे क्या खाएंगे? कहता है कि आंदोलन तो ‘बड़े’ लोग चला रहे हैं लेकिन पिस रहा है रिपेयर कारीगर। 
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रिपेयर कारीगर राजू बताता है कि वह सामान्य दिनों में पांच सौ रुपये तक कमा लेता था। दो सप्ताह से कामकाज नहीं हो रहा है। आजकल किसी तरह सौ-पचास रुपये मिल पा रहे हैं।

बाक्स::
चोरी छिपे गिरवी गांठ का काम जारी
सराफा आंदोलन से भले ही बाजार बंद हैं, लेकिन ज्यादातर कारोबारी दोपहर से शाम तक अपने परिचित ग्राहकों की मदद करते दिख जाएंगे। जरूरतमंद जेवर गिरवी रखने आते हैं, कुछ कारोबारी इनको ब्याज पर पैसा दे रहे हैं। चुपचाप आभूषण खरीद भी हो रही है। सराफा एसोसियेशन अध्यक्ष संदीप अग्रवाल ने बताया कि आंदोलन में कारोबार करने वालों से जुर्माना वसूला जा रहा है।
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