कैंट थाना क्षेत्र के गांव बभिया में घर से खेत जाने के दौरान किया हमला
बरेली। कैंट थाना क्षेत्र के गांव बभिया में बुधवार सुबह सांड़ ने किसान रामफेर पाराशर (62) को पटककर मार डाला। साथ ही, गांव के उदयवीर सिंह, विद्यावती, अमित और अशोक को घायल कर दिया। इससे गांव के लोगों में दहशत है। प्रधान धर्मपाल सिंह ने बताया कि गांव में काफी छुट्टा पशु हैं, लेकिन हमला करने वाले सांड़ को मंगलवार को ही कोई गांव के पास छोड़ गया है।
बभिया निवासी मुनेंद्र पाराशर ने बताया कि उनके चाचा रामफेर अविवाहित थे और खेती करते थे। वह सुबह घर से खेत जाने के लिए निकले थे। रास्ते में सांड़ ने उन पर हमला कर दिया। उन्हें अस्पताल लेकर गए तो डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। ग्राम प्रधान ने बताया कि एक महिला समेत चार अन्य लोगों को भी सांड़ ने घायल किया है। गांव में कोई गोशाला नहीं है। इसके लिए पूर्व में प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन बाढ़ग्रस्त क्षेत्र होने के कारण मंजूरी नहीं मिल सकी।
प्रधान ने बताया कि छुट्टा पशु पहले भी ग्रामीणों पर हमला कर चुके हैं। अधिकारियों से शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं की गई। इस कारण बुधवार को बुजुर्ग किसान की जान चली गई। इंस्पेक्टर कैंट अभिषेक सिंह ने बताया कि परिजनों की सूचना पर शव का पोस्टमाॅर्टम कराया गया है।
मौत के बाद चेते जिम्मेदार, पकड़ा गया सांड़
किसान रामफेर की मौत के बाद जिम्मेदारों की नींद टूटी। क्यारा ब्लॉक के बीडीओ सुखपाल सिंह और पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजेश यादव टीम के साथ गांव पहुंचे। तीन घंटे की मशक्कत के बाद शाम को सांड़ को पकड़ लिया गया। सांड़ काबू में नहीं आ रहा था। उसे बेहोशी के दो इंजेक्शन देने पड़े। बाद में वाहन के जरिये सांड़ को आबादी से दूर छोड़ दिया गया।
गांव से पकड़े जा चुके हैं 300 से ज्यादा पशु
प्रधान ने बताया कि गांव सड़क पर होने के कारण अक्सर रात में लोग यहां पशुओं को छोड़ जाते हैं। पिछले दिनों वह डीएम से मिले थे। डीएम के आदेश पर गांव से अलग-अलग समय पर 300 से ज्यादा छुट्टा पशुओं को पकड़कर मानपुर गोशाला और नगर निगम की गोशाला में भेजा गया था। हालांकि, अब भी गांव में 200 से ज्यादा छुट्टा पशु हैं।
सौ से ज्यादा गोशालाएं, फिर भी सड़कों पर जमावड़ा
बरेली। जिले में निराश्रित पशुओं के संरक्षण के लिए 102 गोशालाएं, दो कांजी हाउस, 11 कान्हा और 12 निजी गोशालाएं संचालित हैं। कुल 127 केंद्रों का भारी-भरकम ढांचा होने के बावजूद छुट्टा पशुओं की समस्या जस की तस बनी हुई है। आए दिन ये लोगों पर हमलावर हो रहे हैं। सड़कों पर डेरा जमाए बैठे पशु हादसों की वजह बन रहे हैं।
शहर के भीतर नगर निगम की देखरेख में कान्हा उपवन जैसी अत्याधुनिक गोशाला होने के बावजूद उसी के आसपास नंदोसी, परसाखेड़ा गौटिया, चंद्रपुर जोगियान व काजियान समेत अन्य गांवों के लोग छुट्टा पशुओं से परेशान हैं। ये पशु अक्सर इनकी फसलों को रौंद देते हैं। निगम इन्हें पकड़ने का दावा करता है, लेकिन सड़कों की तस्वीर कुछ और ही कहानी कहती है। डेलापीर जैसे व्यस्ततम चौराहे पर दिन-रात पशुओं का जमावड़ा रहता है। यही हाल बड़ा बाईपास का भी है।