‘ब’ से बीडीए ‘ब’ से बिल्डर, इन दोनों का काम घर बनाकर देना है। लोग बिल्डरों को पैसा देकर अपने घर का सपना देखने लगते हैं और बीडीए और को भी, लेकिन इनमें से कोई भी पैसा वसूलने के बाद भी उन्हें घर देने का सपना पूरा नहीं कर पा रहा है। नोटबंदी के बाद आई मंदी की मार से रियल स्टेट का कारोबार तो थम ही गया है, जिसकी वजह से वे इस दिवाली पर भी तमाम लोगों को सपना पूरा नहीं कर पा रहे हैं। बरेली विकास प्राधिकरण का हाल तो बिल्डरों से भी बुरा है। रामगंगा नगर आवासीय योजना में प्लाट लेने के लिए एक दशक पहले जिन लोगों ने पैसा जमा किया था, उन्हें अभी तक बीडीए ने प्लाट नहीं दिए हैं। बीडीए ने यहां जो आवास बनवाए हैं, उन पर भी अभी तक कब्जा नहीं दिया है। यही हाल समाजवादी आवास योजना का है। सरकार बदलने पर योजना का नाम मुख्यमंत्री आवास योजना हो गया, लेकिन मकान बनने के बाद आवंटन अभी तक लटका है। सीबीगंज की आसरा योजना में भी अभी तक घरों का आवंटन नहीं किया गया। अफसरों के इस रवैये से बीडीए की योजनाओं के तहत भी लोगों को इस साल भी दिवाली से पहले अपना अशियाना मिलने की उम्मीद पूरी होती नजर नहीं आ रही है। यही हाल रहा तो बीडीए प्लाट और मकान बुक कराने वालों को नहीं, शायद उनके बच्चों को ही घर दे पाएगा।
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रामगंगा आवासीय योजना
बरेली विकास प्राधिकरण ने 2004 में इस रामगंगा आवासीय योजना की शुरूआत की। इस योजना के लिए चंद्रपुर बिचपुरी, मोहनपुर उर्फ रामनगर, डोहरिया और अहिरौला गांवों की 269.965 हेक्टेयर जमीन प्रस्तावित हुई। जबकि 259.36 हेक्टेयर जमीन ही कालोनी के लिए बीडीए ने किसानों से ली। योजना को 12 सेक्टरों में बांटक र बनाया जा रहा है। इसमें एक सेक्टर समाजवादी(मुख्यमंत्री) आवास योजना को दे दिया गया। रामगंगा नगर आवासीय योजना के तहत बीडीए अब तक 3000 आवास बना चुका है। कुछ आवासों के बैनामे हो चुके हैं, लेकिन कानूनी तौैर पर किसी को कब्जा अभी तक नहीं दिया है। प्लाटों के लिए दस साल पहले 4 से 5 लाख रुपये जमा करने वाले परेशान घूम रहे हैं। किसी को बीडीए के अधिकारी प्लाट की लोकेशन ही नहीं बता रहे हैं।
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मुख्यमंत्री आवास योजना
रामगंगा आवास योजना में ही सेक्टर-9 को बीडीए ने समाजवादी (वर्तमान में मुख्यमंत्री) आवास योजना के नाम से भी 70 भवन बनवाने का काम निजी ठेकेदारों को दिया है। इन मकानों की कीमत साढ़े 26 लाख रुपये रखी गई है। करीब 82 गज के यह डबल स्टोरी मकान बन तो गए हैं, लेकिन किसी को अभी तक कब्जा नहीं मिल पाया है। जबकि जिन लोगों ने मकान बुक कराए हैं, वह कब्जा लेने के लिए बीडीए दफ्तर के लगातार के चक्कर काट रहे हैं। बीडीए के आला अधिकारियों के इस रवैये से इस दिवाली पर भी लोगों का अपने घर में जाने का सपना पूरा नहीं होगा।
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आसरा योजना
सीबीगंज में 1013.76 लाख रुपये की लागत से आसरा योजना का चार अप्रैल 2015 को शुभारंभ हुआ। योजना का काम 9 सिंतबर 2016 को काम पूरा होकर लोगों को घर मिल जाने चाहिए थे। योजना के तहत 22 ब्लाकों में 264 घर बनाए जाने का प्रस्ताव था। डूडा ने सीएंडडीएस उत्तर प्रदेश जल निगम की यूनिट 49 से इस योजना का निर्माण कार्य कराया। कार्यदायी संस्था के काम की क्वालिटी को लेकर पूरे प्रदेश में शोर मचा हुआ है। संस्था ने यहां भी ऐसा ही किया। जिसकी वजह से अभी तक मकानों का काम ही पूरा नहीं हो पाया है। कालोनी की कई सड़कें अभी तक कच्ची हैं। इस योजना के आवासों के आसपास गंदगी की वजह से घास जम आई है। योजना का बोर्ड पर आई जंग ही इस कालोनी की हकीकत बयां कर रही है।
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ट्रांसपोर्ट नगर योजना
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र काउंटर मैगनेट सिटी योजना के तहत बीडीए ने शाहजहांपुर रोड पर ट्रांसपोर्ट नगर के लिए 24.89 हेक्टेयर जमीन किसानों से खरीदी थी। 1996-97 में इस योजना को प्रारंम्भ किया गया। योजना में 1074 प्लाट ट्रांसपोटर्स के लिए थे। 12 दुकानें थीं। पैट्रोल पंप, होटल, ढाबा, धर्मकांटा, डिसपेंसरी, बिजनसे सेंटर, फायर स्टेशन, पुलिस स्टेशन, कम्युनिटी हाल, आरटीओ ऑफिस के लिए 18 भूखंड आरक्षित किए गए थे। यहां आवंटन इस तरह हुआ कि आधे से ज्यादा उन लोगों ने प्लाट खरीद जिनका ट्रांसपोर्ट से कोई मतलब नहीं है। बीडीए ने मैकनिकों के लिए प्लाटों की कोई ठोस योजना नहीं बनाई। जिसकी वजह से अभी तक ट्रांसपोर्ट नगर बस ही नहीं पाया।
रामगंगा नगर योजना में आवासों का आवंटन कर दिया गया है। वहां लोग रहने ही जाना नहीं चाह रहे हैं। आवंटियों ने दिलचस्पी दिखाई तो हमारी कोशिश यही है कि दिवाली से पहले सभी को कब्जा दिला दिया जाए- सुरेंद्र सिंह पांडेय, उपाध्यक्ष, बीडीए
आसरा योजना के आवासों में कुछ कमी रह गई है। उसे पूरा कराने की कोशिश की जा रही है। जल्द ही आवासों की कमियां पूरी कराकर दिवाली से पहले ही आवासों पर कब्जा दिलाने का प्रयास करेंगे- विनय कुमार, परियोजना प्रबंधक, डूडा
केस-1
रामगंगा आवासीय योजना में 2010 में बीडीए ने प्लाट देने के लिए पैसा जमा करा लिया लेकिन अभी तक प्लाट नहीं दिया है। सात साल होने को हैं। हर साल दिवाली पर नए घर में जाने का सपना देखते हैं, लेकिन बीडीए के अधिकारियोें के ढुलमुल रवैये की वजह से टूट जाता है। हमारा पैसा बैंक में भी होता तो दोगुना हो गया होता- ममता, दुर्गानगर
केस-2
बीडीए ने घर बनाने का सपना दिखाकर प्लाट का पैसा तो जमा कर लिया, लेकिन सात साल में भी हमें प्लाट नहीं मिल पाया। हम पैसा फंसने की वजह से कहीं और भी प्लाट नहीं खरीद पाए। ऐसे में नए घर का सपना अभी तक सपना ही बना हुआ है। बीडीए के अधिकारियों को चाहिए कि वह जल्द प्लाटों का आवंटन करे- रितु, पुराना शहर
केस-3
रामगंगा नगर आवासीय योजना में मैने 2010 में प्लाट बुक कराया था। करीब पांच लाख रुपये जमा हुए थे। हमारे भाई ने भी प्लाट बुक कराया था। सात साल में अभी तक प्लाट तो नहीं मिल पाया। बीडीए के अधिकारियों का कहना है कि डिफरेंस जमा करिए। कालोनी में डबलपमेंट होगा तो प्लाट मिल जाएगा- आशीष कुमार सक्सेना, राजेंद्र नगर