अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। फतेहगंज पूर्वी के निबरिया भगवानपुर कुंदन गांव के 18 वर्षीय सोनू की सड़क दुर्घटना में मौत होने के बाद पोस्टमार्टम में देरी होने पर बसपा नेता और पूर्व प्रधान राजकुमार पाल ने जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बवाल कर दिया। उसने अपने साथियों की मदद से कुर्सियां तोड़ डाली और मेडिकल का सामान को फेंक दिया। डाक्टर और स्टाफ ने रोकने की कोशिश की तो उनकी पिटाई कर दी। हंगामा और मारपीट की फोटो खींच रहे दो मीडिया कर्मियों के साथ भी मारपीट करने वालों ने अभद्रता की। उनके कैमरे छीनकर फोटो डिलीट करवा दिए। घटना से नाराज चिकित्सकों व स्टॉफ ने जिला अस्पताल की ओपीडी का काम ठप कर दिया। करीब एक घंटा ओपीडी बंद रहने की वजह से मरीजों को वापस लौटना पड़ा। मामले में डॉक्टर शिवदत्ता ने पूर्व प्रधान के अलावा 15-20 अन्य लोगों के खिलाफ कोतवाली में मारपीट, तोड़फोड़ करने और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में मुकदमा लिखवाया है।
शुक्रवार की सुबह 11 बजे सोनू और उसके चाचा राजेश की डीसीएम की टक्कर से घायल होने पर जिला अस्पताल की इमरजेंसी लाया गया। सोनू की मौत हो चुकी थी, जबकि राजेश के हाथ में चोट आई है। जांच के बाद डॉ. शिवदत्ता ने सोनू के शव को मोरचरी में रखवा दिया। इसी बीच पूर्व प्रधान राजकुमार पाल 15 से 20 लोगाें के साथ शोर मचाते हुए इमरजेंसी में घुस गए और गाली गलौज करने लगे। डॉक्टरों ने पुलिस को बताया कि राजपाल तुरंत शव का पोस्टमार्टम करने का दबाव बना रहा था, जबकि उसे बताया गया कि मेमो से पुलिस को सूचना दे दी गई है। पोस्टमार्टम वे ही करवाएंगे। इतने में राजपाल का पारा हाई हो गया। उसने टेबल पर हाथ पटका और कुर्सी पर लात मारी। डॉक्टर की ब्लड प्रेशर मशीन व थर्मामीटर भी तोड़ डाला। मौजूद चिकित्सक शिवदत्ता, फार्मासिस्ट यूसी शर्मा और चतुर्थ श्रेणी कर्मी राजेश को खूब पीटा। चैनल के दो कैमरामैन को पीटा और उनके कपड़े फाड़ डाले। जानकारी मिलते ही सीएमएस डॉ. डीपी शर्मा और पुलिस पहुंच गई। उसे कोतवाली लाया गया। सीओ मुकुल द्विवेदी ने बताया कि जिला अस्पताल में डॉक्टरों के साथ अभद्रता करना गंभीर मामला है। आरोपियों के खिलाफ मुकदमा लिखकर कार्रवाई कराई जा रही है। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
मच गई अफरा-तफरी, बंद हो गई ओपीडी
डॉक्टर, फार्मासिस्ट और चतुर्थ श्रेणी कर्मी के पिटने की जानकारी हुई तो पूरा अस्पताल बंद करवा दिया गया। ओपीडी से डॉक्टर बाहर आ गए। डॉक्टरों की मांग थी कि राजपाल के खिलाफ मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई हो। कोतवाली पुलिस को डॉ. शिवदत्ता की ओर से तहरीर दी गई। सीएमओ डॉ. विजय यादव और सीएमएस डॉ. डीपी शर्मा के समझाने के बाद सभी चिकित्सक एक घंटे बाद ओपीडी में लौटे। इस दौरान न तो इमरजेंसी में मरीज देखे गए और न ही दवाएं बंटी। पर्चे बनाने भी बंद कर दिए गए।
बिना दवा लिए मरीज लौटे
जब हंगामा हुआ तो करीब 500 से अधिक मरीज ओपीडी और 200 मरीज दवा काउंटर पर खड़े थे। ये सभी मरीज हड़ताल की सूचना पाकर लौट गए। एक बजे के बाद ओपीडी शुरू हुई तो गिने चुने मरीज ही खड़े थे। बुखार से पीड़ित महिला रेखा वहीं ओपीडी के बाहर लेटी कराहती रहीं। सदर कैंट से आई महिला भी लौट गई।
वर्जन-
‘कोई चिकित्सक हड़ताल पर नहीं है। सभी डॉक्टर इलाज करेंगे। रिपोर्ट कोतवाली में लिखवा दी गई है-डॉ. डीपी शर्मा, सीएमएस
घटिया क्वालिटी का था हेलमेट
बरेली। बाइक पर सोनू हेलमेट तो लगाए था लेकिन वह बेहद घटिया क्वालिटी का था। लिहाजा हादसा होने पर जब सोनू का सिर डीसीएम के पहिया से टकराया तो हेलमेट चूर-चूर हो गया और सोनू का सिर फट गया। बाइक चला रहे राजेश टक्कर लगने के बाद उछलकर मिट्टी पर जा गिरे थे।
अमूमन यह देखा गया है कि लोग वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए सड़क किनारे फड़ लगाकर बिकने वाले सस्ते हेलमेट खरीद लेते हैं। हेलमेट खरीदते वक्त उनके जेहन में अपनी जान की सुरक्षा का ख्याल नहीं रहता बल्कि वे सिर्फ पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए घटिया और सस्ता हेलमेट खरीद लेते हैं। सोनू ने अगर किसी भी अच्छी कंपनी का आईएसआई मार्क वाला हेलमेट लगाया होता तो उसकी जान नहीं जाती। हेलमेट का अच्छी गुणवत्ता का होना बेहद जरूरी है, तभी वह हादसे के वक्त सिर को सुरक्षित रख सकता है। बाइक के दुर्घटनाग्रस्त होने पर ज्यादातर मौतें सिर में गंभीर चोट लगने से ही होती हैं। हेलमेट को आईएसआई मार्क तभी दिया जाता है जब उसकी गुणवत्ता को विभिन्न मानकों पर परख लिया जाता है।