एक्सचेंजाें और कार्यालयाें पर लगे जेनरेटराें के लिए भी ईधन सप्लाई प्रभावित होने लगी है। जीएम ने ईपीएफ विभाग की खाते सीज करने की कार्रवाई को गलत बताया है।
पिछले दिनाें क्षेत्रीय आयुक्त कर्मचारी भविष्य निधि संगठन आलोक यादव ने एक पुराने मामले में बीएसएनएल के बैंक खाते सीज करा दिए। बीएसएनएल अब ट्रिब्यूनल की शरण में है। पिछले एक सप्ताह में जारी हुए चेक पंजाब नेशनल बैंक खाते से बाउंस हो गए हैं। ये चेक डीजल खरीद के एवज में पेट्रोल पंप मालिकों को जारी किए गए थे। बीएसएनएल हर माह 35 से 40 लाख रुपये तक डीजल आदि पर खर्च करता है। चेक बाउंस होने पर लोग जीएम लेखा कार्यालय में शोर शराबा कर रहे हैं। कर्मचारियों के छोटे-मोटे भुगतान पर भी असर पड़ा है।
ठप हो सकती हैं संचार सेवाएं
जीएम मणिराम ने क्षेत्रीय आयुक्त ईपीएफ आलोक यादव से आग्रह किया है कि जरूरी भुगतान के अलावा ईधन आदि की सप्लाई ठप हो गई है। अगर सीज खाते तुरंत न खोले गए तो बरेली, बदायूं, पीलीभीत आदि जिलाें की मोबाइल सर्विसेज ईधन आपूर्ति के अभाव में ठप हो सकती हैं। एक्सचेंज भी प्रभावित हाेंगे। इससे संचार सेवा के साथ, बैंकिंग आदि अन्य सेवाओं पर भी असर पड़ेगा।
तीन ईपीएफ खाते
जीएम मणिराम ने कहा है कि बीएसएनएल में तीन ईपीएफ खाते चल रहे हैं। जीएम, टीडीएम बरेली नाम से खाता सीज किया गया है। जबकि उनके यहां का ईपीएफ संबंधी कोई मामला लंबित नहीं है। जीएम ने बताया कि ईपीएफ कार्यालय से वसूली की दो सूची आई थी जिससे वसूली होनी थी उस पर एक्जीक्यूटिव इंजीनियर सिविल बीएसएनएल लिखा था। इसलिए जीएम नाम से संचालित खाता सीज किया जाना पूरी तरह से गलत है। ईपीएफ अफसराें ने किसी भ्रमवश उनका खाता सीज किया है।